भारत में स्वास्थ्य सेवा पहले से ही महंगी है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं झूठ और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई हैं। ऐसे में अमेरिका के प्रे. ट्रंप ने दवाओं पर १०० प्रतिशत टैरिफ लगाकर भारतीय दवा कंपनियों को झटका दिया है। अमेरिका में आयात होनेवाली ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर १०० प्रतिशत टैरिफ का भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर गहरा असर पड़ेगा। भारत का दवा व्यापार दो लाख करोड़ रुपए का है। भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है। देश की अर्थव्यवस्था में दवा कंपनियों के कारोबार का बड़ा योगदान है। भारत से अमेरिका जाने वाली दवाओं में भारत का एक बड़ा हिस्सा है। अमेरिका में वितरित हर १० प्रिस्क्रिप्शन में से ४ प्रिस्क्रिप्शन भारतीय दवा कंपनियों के होते हैं। उच्च रक्तचाप, लिपिड रेग्युलेटर, डायबिटीज, मेंटल हेल्थ, न्यूरो और अल्सर की दवाएं भारत से अमेरिका जाती हैं। इन सभी दवा कंपनियों को प्रे. ट्रंप के टैरिफ का झटका लगा है और दवा उद्योग के पास इस झटके से उबरने के लिए कोई दवा नहीं है। ट्रंप के इस पैâसले से भारतीय दवा उद्योग हिल जाएगा और अपना आर्थिक गणित सुधारने के लिए भारत में दवाओं के दाम बढ़ा दिए जाएंगे। इसका असर गरीब और मध्यम वर्ग की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। प्रे. ट्रंप भारतीय उद्योग व्यापार से बदला लेने जैसा व्यवहार कर रहे हैं। वे भारत की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करना चाहते हैं। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की जो घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने की है, उसमें वे निश्चित रूप से सेंध लगाना चाहते हैं। किसको
सबक सिखाने का
यह काम प्रे. ट्रंप कर रहे हैं? अमेरिका को दवा निर्यात करने वाली पांच बड़ी भारतीय कंपनियां हैं। इनमें सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, ल्यूपिन, अरबिंदो फार्मा का समावेश है। देश का दवा उद्योग इन्हीं पांच कंपनियों के इशारे पर चलता है। इस उद्योग के ये ‘पंचक’ डॉन हैं। मोदी और उनकी पार्टी को सबसे ज्यादा चंदा देने वाली भी यही कंपनियां हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा की तिजोरी भरने में इन दवा कंपनियों का बड़ा योगदान है। पी.एम. केयर फंड में भी इन्हीं कंपनियों के आंकड़े बड़े हैं। कहा जाता है कि दवा कंपनियों ने पी.एम. केयर फंड में सवा लाख करोड़ रुपए का दान दिया। अगर ये आंकड़े सच हैं तो प्रे. ट्रंप मोदी के वित्तपोषकों की कमर तोड़ रहे हैं और यह एक सोची-समझी रणनीति है। प्रे. ट्रंप जितने लगते हैं, उतने बेवकूफ नहीं हैं। ट्रंप द्वारा दवा कंपनियों पर लगाया गया टैरिफ ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति का हिस्सा है। ट्रंप की नीति अमेरिका में ही दवा उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी दवाओं पर निर्भरता कम करना है। यानी मोदी और उनके लोग अपने भारत में जो स्वदेशी का नारा दे रहे हैं, आत्मनिर्भरता का बैंड बजा रहे हैं, वही प्रे. ट्रंप अपने अमेरिका में कर रहे हैं। अमेरिका में हजारों करोड़ की दवाइयां निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियां अपने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के चुनावी खाते में जमा करती हैं। देश की जनता को इससे कोई फायदा नहीं होता। प्रे. ट्रंप ने भारतीय दवा उद्योग की गर्दन पर शायद इसीलिए पैर रख दिए हैं। भारत में स्वास्थ्य और स्वास्थ्य बीमा एक बड़ा उद्योग बन गया है, जिसमें सेवा कम और
धोखाधड़ी ज्यादा
है। भारत से अमेरिका को जेनेरिक दवाएं निर्यात की जाती हैं। ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं को टैरिफ से बाहर रखा है। फिर भी भारतीय फार्मा उद्योग अमेरिका में निर्यात करनेवाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। जो भारतीय कंपनियां अमेरिका में उनका उत्पादन कर रही हैं (मेक इन अमेरिका) उन पर टैरिफ का झटका नहीं लगेगा, लेकिन ३२,००० करोड़ रुपए के दवा निर्यातक संकट में आ जाएंगे। ट्रंप की नई टैरिफ घोषणा के बाद वोकार्ट, सन फार्मा, बायोकॉन कंपनियों के शेयर गिर गए; जबकि मर्क, एली लिली और जे एंड जे जैसी कंपनियों के शेयर वॉल स्ट्रीट पर चढ़ गए। इन कंपनियों ने पहले ही अमेरिका में अपनी विनिर्माण इकाइयां शुरू कर दी हैं। भारतीय दवा कंपनियों को अब अमेरिका में अपने उद्योग और विनिर्माण इकाइयां स्थापित करनी होंगी। इसका मतलब भारत के रोजगार पर इसका असर पड़ेगा। पांच कंपनियां अकेले सिर्फ अमेरिका को ३८ हजार करोड़ का निर्यात करती हैं। इन निर्यातों पर ‘कर’ आदि का लाभ कम हो जाएगा। क्योंकि ट्रंप दवा क्षेत्र में भी अमेरिका को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं और ट्रंप ने भी अपने देश में स्वदेशी का नारा दिया है। भारत में मोदी ने भी स्वदेशी का नारा दिया है। वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी ही विदेशी वस्तुओं का सबसे अधिक उपयोग करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह के सुपुत्र जय शाह क्रिकेट उद्योग के निमित्त दुबई में ही हैं। केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेशों में (विशेषकर अमेरिका में) भारी वेतन पर काम करते हैं और यहां उनके पिता स्वदेशी पर भाषण देते हैं। ट्रंप ने स्वदेशी का नारा देकर भारतीय दवा कंपनियों के लिए दुविधा पैदा कर दी है। मोदी इस पर चुप हैं। ट्रंप ने मोदी को चुप रहने के लिए कौन सी गोली दी है? यह तो ये सभी दवा कंपनियां ही जानती हैं।
