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जनभाषा प्रचार समिति ने साहित्य पर सोशल मीडिया का प्रभाव पर वाद विवाद आयोजित किया

ठाणे: साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ठाणे गद्य गोष्ठी में ‘साहित्य पर सोशल मीडिया का प्रभाव’ विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन मुन्ना बिष्ट कार्यालय, सिडको बस स्टॉप, ठाणे, पश्चिम में किया गया। इसमें कुल 12 प्रस्तुतियां हुई। कार्यक्रम कथाकार, कवयित्री लक्ष्मी यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक राजेश विक्रांत एवं विद्वान कवि, ग़ज़लकार व वक्ता अवनीश दीक्षित उपस्थित थे। पुरस्कार विजेता साहित्यकारों में प्रथम लालबहादुर यादव कमल, द्वितीय नरसिंह हैरान जौनपुरी, तृतीय रामजीत गुप्त, प्रोत्साहन राकेश मणि त्रिपाठी थे। जबकि सत्यभामा सिंह जिया, डा.आनंदी सिंह रावत, त्रिलोचन सिंह अरोरा, सदाशिव चतुर्वेदी ‘मधुर’, विनय शर्मा दीप, एड अनिल शर्मा, डा.कनकलता तिवारी व लक्ष्मी यादव ओजस्वनी की प्रस्तुतियां भी सराही गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था अध्यक्ष नंदलाल क्षितिज व अनिल कुमार ‘राही’ का उल्लेखनीय योगदान रहा। गोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके सभी अतिथियों ने किया। सदाशिव चतुर्वेदी मधुर ने सुंदर प्रार्थना से वातावरण को भावुक बना दिया।

कार्यक्रम संचालन संस्था चेयरमैन रामप्यारे सिंह रघुवंशी ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार नामदार राही, विनय सिंह विनम्र,सुशील कुमार सिंह, हरीशंकर मिश्र, कल्पेश यादव आदि उपस्थित थे। प्रतियोगिता के पश्चात नौ उपन्यास, तीन कहानी संग्रह, तीन नाटक और कार्यालयीन हिंदी नामक पुस्तकों के लेखक डॉ प्रभु दयाल मंढ़इया विकल के देवलोकगमन होने पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। राष्ट्रगीत पश्चात समारोह का समापन किया गया।

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