मुख्यपृष्ठग्लैमरसनातन सेना के नाम और काम से देश का युवा उत्साहित-सुरजीत सिंह 

सनातन सेना के नाम और काम से देश का युवा उत्साहित-सुरजीत सिंह 

उत्तर प्रदेश के अमेठी से निकलकर मायानगरी मुंबई में युवाओं के बीच सनातन सेना का बिगुल फूंकने वाले युवा उद्यमी, राजनेता एवं समाजसेवी सुरजीत सिंह आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। आज वो मुंबई समेत देश के तमाम राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं से ग्रसित लोगों के बीच एक उम्मीद की किरण बनकर उभर चुके हैं। प्रस्तुत है युवा समाजसेवी सुरजीत सिंह से हमारे संवादाता सोम मिश्रा `शिवम’ की हुई बातचीत के प्रमुख अंश।
आपके जीवन पर लिखी पुस्तक `सफर एक पड़ाव’ विमोचन से पहले ही सुर्खियां बटोरने लगी? 
बिल्कुल, मेरे लिए बड़े ही हर्ष की बात है जो देश के हर वर्ग का युवा मुझे सहयोग करता है और वही हमारी प्रगति की सबसे बड़ी ताकत है। मेरे जीवन पर लिखी पुस्तक का जल्द ही आप सभी के बीच विमोचन होगा, जिसका लेखन मशहूर फिल्म कलाकार एवं लेखक नीरज चौधरी ने किया है।
जीवन के संघर्षों पर प्रकाश डालती इस पुस्तक का प्रकाशन कराने के पीछे की मंशा क्या है?
देश की युवा शक्ति को प्रेरित करना ही इस पुस्तक का उद्देश्य है। नीरज चौधरी हमारे अच्छे दोस्तों में से एक हैं। हमारे निकट रहते हुए उन्होंने हमारे संघर्ष को देखा है और उसी से प्रेरित होते हुए उन्होंने इस पुस्तक का प्रकाशन कर दिया, जो युवाओं को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति कर्मठ बनाने में सहायक होगी।
अब तक के संघर्षों से जीवन में मिली सफलताओं को आप कैसे देखते हैं?  
मैंने जो कुछ भी इतने समय में हासिल किया है, उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। सोचा नहीं था मंजिल इस उम्र में ही यहां तक पहुंचा देगी लेकिन वो सब मिला है, जिसके लिए हम रात-दिन संघर्ष किए हैं और अब समाज के लिए अधिक से अधिक समय देते हुए उनके अधिकारों की रक्षा करना ही मेरा एकमात्र उद्देश्य है।
आए दिन आप तमाम बड़े-बड़े लोगों के सामने सनातन और हिंदुत्व को लेकर मुखर होते नजर आते हो, ऐसे में आपको इन लोगों से डर नहीं लगता? 
मैं कट्टर सनातनी हूं। वो भी बजरंगबली का भक्त, तो ऐसे में भय उत्पन्न होने का सवाल ही नहीं उठता। वैसे भी मैं हमेशा सत्य के लिए आवाज उठाता हूं। मेरा मानना है, जो भी सनातन और हिंदुत्व के विरुद्ध बोलेगा मैं उसके खिलाफ लड़ता रहूंगा। आज देश का युवा जागरूक हो चुका है ऊपर से मैं एक क्षत्रिय तो ऐसे में युवाओं के साथ मिलकर सनातन का बिगुल बजाना मेरी नैतिक जिम्मेदारी बनती है।
हिंदूवादी छवि और सनातन का झंडा बुलंद करने वाले देश के युवानेता बनकर मुंबईकर के बीच लोकप्रिय होना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
जीवन में चुनौतियों का सामना तो हर किसी को करना पड़ता है। मैंने भी चुनौतियों को स्वीकारा है। खास करके तब जब देश के सबसे ज्यादा हिंदूवादी नेता और हिंदूवादी संगठन महाराष्ट्र की धरती पर सक्रिय हैं। ऐसे में मुंबईकर के साथ स्वयं को जोड़कर आगे बढ़ना इतना आसान नहीं था। लेकिन ईश्वरीय कृपा से मुझे यहां की युवा शक्ति का भरपूर सहयोग मिला और इस मिशन को शून्य से शिखर तक काबिज कर दिया।
मुंबई में आपकी छवि एक सफल उद्यमी, राजनेता एवं समाजसेवी के रूप में तेजी से उभर रही है, क्या कहना चाहेंगे? 
आज जो भी पहचान मिली है, वह मेरे अपने बड़ों के आशीर्वाद से हासिल हुई है। उन्हीं के मार्गदर्शन से मैं आज सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा हूं।

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