– राज्यपाल से करेंगे शिकायत, सौंपेंगे ज्ञापन
– आदिवासी स्कूलों में प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री से नाराज
सामना संवाददाता / मुंबई
इन दिनों राज्य की महायुति सरकार का कामकाज मनमाने ढंग से चल रहा है। महंगाई और बेरोजगारी के इस आलम में सरकारी संस्थानों में निजीकरण को बढ़ावा दिया रहा है। ऐसे में कई मंत्री भी सरकारी संस्थानों में निजीकरण के पैâसले से परेशान हैं। इसे लेकर वे खासा नाराज हैं। इन मंत्रियों व विधायकों ने फडणवीस सरकार के खिलाफ ‘यलगार’ करते हुए राज्यपाल से इसकी शिकायत करने का मन बना लिया है।
बता दें कि आदिवासी स्कूलों में प्राइवेट कंपनी के माध्यम से शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती हो रही है। प्राइवेट कंपनियों की एंट्री से इससे जुड़े मंत्री काफी नाराज हैं। मंत्री नरहरि झिरवल ने इस संदर्भ में साफ कहा कि सरकारी संस्थानों में निजीकरण को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। हम इसके खिलाफ हैं। भले ही हमारी सरकार हो, हम इसकी शिकायत राज्यपाल से करेंगे और उन्हें इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपेंगे। राज्य के अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवल के नेतृत्व और पहल से सकल आदिवासी समाज ये प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपने वाला है।
झिरवल के अनुसार, उनकी मांग है कि आदिवासी स्कूलों में निजी कंपनी के माध्यम से की जा रही भर्ती रद्द की जाए, बंजारा और धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण में शामिल न किया जाए। इन प्रमुख मांगों के लिए आदिवासी महापंचायत का आयोजन किया गया था। इस महापंचायत में पारित सभी प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपे जाने वाले हैं और इसके लिए राज्यपाल से जल्द ही समय लिया जाएगा, ऐसी जानकारी झिरवल ने दी।
यह है मामला
राज्य में आदिवासी समाज के कुल २५ विधायक हैं। इन सभी विधायकों की ६ अक्टूबर को संयुक्त बैठक होने की जानकारी है। मंत्री झिरवल की पहल से राज्यपाल से मुलाकात करने की योजना चल रही है। इस दौरान आदिवासी महापंचायत में पारित प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपे जाएंगे। बाहरी स्रोत से हो रही भर्ती रद्द करने की विनती राज्यपाल से की जाएगी। आदिवासी स्कूलों में निजी कंपनी के माध्यम से वर्ग-३ और वर्ग-४ श्रेणी के १,७९१ पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू है। इस भर्ती के विरोध में नासिक के आदिवासी आयुक्तालय के सामने पिछले तीन महीनों से बिरहाड़ आंदोलन चल रहा है। नासिक में इस समय बारिश का जोर बढ़ गया है, लेकिन भारी बारिश में भी आंदोलन जारी है और आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।’
