मुख्यपृष्ठअपराधअंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का रैकेट चला रहा था शिंदे गुट का नेता!

अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का रैकेट चला रहा था शिंदे गुट का नेता!

-पूर्व महापौर ललित कोल्हे समेत ८ गिरफ्तार

-३१ लैपटॉप और ७ मोबाइल जब्त

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचाने वाली एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। जलगांव के पूर्व महापौर और शिंदे गुट के सक्रिय नेता ललित कोल्हे के फार्म हाउस पर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का अड्डा चलाया जा रहा था। पुलिस ने अचानक छापा मारते हुए इस फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया और ललित कोल्हे समेत कुल ८ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
यह छापा रविवार को जलगांव शहर से १० किलोमीटर दूर ममुराबाद रोड स्थित एल. के. फार्महाउस पर मारा गया। शुरुआती जांच में दो लैपटॉप बरामद हुए, जिनसे विदेशी नागरिकों को कॉल कर के उन्हें ठगा जा रहा था। इसके बाद फार्महाउस की तलाशी में कुल ३१ लैपटॉप, ७ मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी उपकरण जब्त किए गए।
वैâसे चल रहा था ये हाई-टेक रैकेट?
जांच में सामने आया है कि फार्महाउस में २५ से ३० लोगों की एक टीम काम कर रही थी, जिसमें कोलकाता के मूल निवासी चार युवक, मुंबई के कुछ युवा और एक विदेशी भाषा बोलनेवाली युवती शामिल है। यह टीम विदेशी ग्राहकों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम पर कॉल कर उनसे बैंक डिटेल्स, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी लेकर लाखों रुपए की ठगी करती थी। बताया जा रहा है कि कई कर्मचारी छुट्टियों के चलते अपने गृहनगर गए हुए थे और सोमवार को वापस लौटने वाले थे। पुलिस अब उनकी भी तलाश कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलच
इस खुलासे के बाद जलगांव के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि एक पूर्व महापौर और वर्तमान में सक्रिय राजनीतिक नेता के फार्महाउस से अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी जैसे संगीन अपराध का संचालन किया जा रहा है। ललित कोल्हे की पहचान शिवसेना (शिंदे गुट) के एक प्रमुख चेहरों में होती है। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी से शिंदे गुट की छवि पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
पुलिस कार्रवाई की सराहना
पुलिस ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के छह घंटे लंबा ऑपरेशन चलाकर जो साहसिक कार्रवाई की है, उसकी सराहना हो रही है। अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई कर एक बड़े साइबर प्रâॉड नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। पुलिस तहकीकात में सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क की जड़ें और किन-किन शहरों या देशों तक पैâली हैं। मनी ट्रेल और डेटा फॉरेंसिक की मदद से आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

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