सूफी खान
गाजा के लिए निकला एक मानवीय मिशन अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला सुरक्षा और सही-सलामत गाजा तक पहुंच जाए उसके लिए तमाम देश न सिर्फ आगे आए हैं, बल्कि उनकी मदद भी कर रहे हैं।
पूर्वी भूमध्य सागर में गाजा की ओर बढ़ रही ग्लोबल सुमुद अब संकट में है। राहत सामग्री और डॉक्टर, कार्यकर्ताओं से भरी यह फ्लोटिला इटली, स्पेन के बाद अब तुर्की के सैन्य ड्रोन की निगरानी में है। फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा से पुष्टि हुई है कि बायराक्तार अकिंची और टीबी टू जैसे अत्याधुनिक ड्रोन इस फ्लोटिला के ऊपर गश्त कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये इजरायल की हरकत हो सकती है।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ ड्रोन ने इस शिप के बेहद करीब आकर चेतावनी जैसे मूवमेंट किए, जिन्हें संभावित हमला माना जा रहा है। फ्लोटिला पर सवार लोगों का कहना है कि हम केवल मानवीय मदद लेकर जा रहे हैं। अगर हम पर हमला होता है, तो यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा।
इस फ्लोटिला में कई यूरोपीय देशों के नागरिक हैं, जिनमें स्पेन और इटली के कार्यकर्ता भी शामिल हैं, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों देशों ने अपने-अपने युद्धपोत इलाके में भेज दिए हैं।
इटली के नौसेना अधिकारी का कहना है कि हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। इस मिशन को मानवीय सहायता के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि सुरक्षा खतरे के रूप में।
जहाज में सवार मशहूर कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग का भी बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि हम युद्ध नहीं, मानवता के लिए निकले हैं। गाजा के लोगों को जरूरत है राहत की, न कि हमलों की।
खबर है कि गाजा पट्टी जा रहे सबसे बड़े मानवीय कारवां ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला की मदद और सुरक्षा के लिए तुर्किये ने भी अपना एयरक्राफ्ट भेज दिया है, जिससे पूरे जहाजों के इस कारवां की निगरानी की जाएगी। इससे पहले इटली और स्पेन भी अपने जंगी जहाज रवाना कर चुके हैं। इन देशों का सिर्फ एक ही मकसद है कि गाजा तक मदद पहुंचाई जा जा सके।
गाजा इस समय भीषण मानवीय संकट से जूझ रहा है, न दवाइयां हैं, न बिजली और न सुरक्षित पानी। ऐसे में यह फ्लोटिला पीड़ितों के लिए उम्मीद बनकर निकली है। मानवता और राजनीति के बीच फंसी यह फ्लोटिला पूरी दुनिया की निगाहों में है। अब देखना यह है कि यह काफिला गाजा पहुंचता है या किसी और टकराव की शुरुआत होती है।
