मुख्यपृष्ठग्लैमरअक्षय खन्ना का असुरगुरु अवतार

अक्षय खन्ना का असुरगुरु अवतार

हिमांशु राज

दुर्गा पूजा की पावन बेला पर भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा रूप देखा है जिसने हर किसी को चौंका दिया है। ‘महाकाली’ से अक्षय खन्ना का अवतरण शुक्राचार्य के रूप में हुआ है और यह बस एक झलक नहीं, बल्कि एक नए युग की आहट है। उनके चेहरे पर पड़ी चाँदी-सी दाढ़ी, साधु का वेश और दृष्टि में चमकता दिव्य तेज मानो उन्हें पुराणों से उठाकर सीधे परदे पर उतार देता है।शुक्राचार्य की गूंजविद्या के आचार्य, संजीवनी के रक्षक और अपराजेय रणनीति में निपुण असुरगुरु—यह रूप सिर्फ़ एक किरदार नहीं बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक है। पहला दृश्य जो सामने आता है, उसमें विशाल पर्वतीय किले की पृष्ठभूमि है, तूफानी आकाश गरज रहा है और प्राचीन यज्ञवेदी की अग्नि लपटें उठ रही हैं। उस तप और रहस्य के बीच खड़े अक्षय खन्ना शांति और शक्ति, दोनों का संगम बन जाते हैं।भव्यता का पहला
अध्याय‘महाकाली’ को पूजा कोल्लूरू ने निर्देशित किया है, जबकि इसके पीछे दूरदृष्टि रखने वाले प्रशांत वर्मा की कल्पना है जिन्होंने पहले ‘हनु-मान’ के जरिए सिनेमा को नया आयाम दिया था। यह फिल्म न केवल अक्षय खन्ना की तेलुगु सिनेमा में एंट्री का प्रतीक बनेगी, बल्कि पूरे प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स का अगला पर्व भी है।सिनेमा में एक नया चमत्कारआरकेडी स्टूडियोज़ और उनके सहयोगियों ने इस परियोजना को जिस भव्यता और गहनता से तैयार किया है, वह दर्शाता है कि भारतीय पौराणिक कथाओं को स्क्रीन पर किस तरह विस्मयकारी अंदाज़ में प्रस्तुत किया जा सकता है। अक्षय खन्ना का यह रहस्यमयी और प्रचंड अवतार केवल एक चरित्र नहीं, बल्कि एक ऐसी सिनेमाई यात्रा का हिस्सा है जिसकी प्रतीक्षा बहुत लंबे समय से की जा रही थी।

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