सामना संवाददाता / मुंबई
कल्याण तालुका के १४ गांवों को नई मुंबई महानगरपालिका में शामिल करने के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्णय के विरोध के बीच अब भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे और वन मंत्री गणेश नाईक आमने-सामने आ गए हैं। मंदा म्हात्रे ने १४ गांवों को नई मुंबई मनपा में शामिल करने का समर्थन किया है, जबकि नाईक ने विरोध किया है।
बता दें कि शिंदे के निर्णय का नाईक आज भी विरोध कर रहे हैं। बताया जाता है कि वन मंत्री गणेश नाईक द्वारा मनपा चुनावों के बाद इन गांवों को फिर से हटाने की चेतावनी के बाद बेलापुर से भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने इन गांवों का समर्थन किया है। गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे के बीच १४ गांवों को लेकर चल रहे विवाद में अब मंदा म्हात्रे के कूदने से नए संकेत मिल रहे हैं। इससे आगामी मनपा चुनाव में यह मुद्दा और अधिक गरमाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बताया जाता है कि वन मंत्री गणेश नाईक ने वाशी में आयोजित एक कार्यक्रम में कल्याण तालुका के १४ गांवों को नई मुंबई मनपा में शामिल करने को अप्रत्यक्ष रूप से शिंदे का सनक करार दिया था।
नई मुंबई मनपा क्यों उठाए बोझ
– नाईक का कहना था कि इन १४ गांवों का बोझ नई मुंबई मनपा क्यों उठाए। नाईक ने इस कार्यक्रम में दावा किया था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वादा किया है कि मनपा चुनाव के बाद इन १४ गांवों को नई मुंबई मनपा से हटा दिया जाएगा।
– इसके बाद बेलापुर से भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे इन गांवों के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने इन गांवों का समर्थन करते हुए कहा कि इन गांवों को मनपा या सरकार को गोद लेना चाहिए।
-म्हात्रे ने नाईक के रुख का अप्रत्यक्ष रूप से विरोध करते हुए कहा है कि नई मुंबई के लिए जिन लोगों की जमीनें अधिग्रहित की गई हैं, उनका भी विकास किया जाना चाहिए। म्हात्रे के इस बयान के बाद से भाजपा खेमे में हलचल मच गई है।
