सुरेश गोलानी / भायंदर
सरकार द्वारा पालघर में प्रस्तावित मुरबे मल्टी-कार्गो पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए तैयार की गई पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट को गैर कानूनी बताते हुए अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति प्रणित मुरबे-जिंदल बंदर विरोधी संघर्ष समिति द्वारा जल समाधि आंदोलन को पुलिस के भारी दबाव के चलते फिलहाल स्थगित किया गया है। समिति द्वारा आंदोलन का इशारा देते ही हजारों की संख्या में खासकर महिलाएं शुक्रवार को सरकार के इस पैâसले के खिलाफ अरब सागर में जल समाधि लेने हेतु पूरी तरह से तैयार थीं। हालांकि, पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों को जारी नोटिस और भारी दबाव के चलते इस आंदोलन को अगले सप्ताह तक स्थगित करना पड़ा। गुस्साए मछुआरों ने सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट करते हुए शनिवार को तारापुर ंमें जिंदल कंपनी के सामने शांतिपूर्ण तरीके से धरना आंदोलन का आयोजन किया।
अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति के अध्यक्ष देवेंद्र दामोदर तांडेल के अनुसार, जल समाधि आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, लेकिन शनिवार को जिंदल कंपनी के सामने दोपहर तीन बजे विरोध प्रदर्शन किया गया और चार बजे जिला कलेक्टर इंदुमती जाखड़ की अध्यक्षता में जेएसडब्ल्यू कंपनी तथा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के अधिकारियों संग सभा का आयोजन किया गया है। उल्लेखनीय है कि मछुआरों और स्थानीय लोगों के कड़े विरोध व आपत्तियों के बावजूद एमपीसीबी द्वारा ६ अक्टूबर, २०२५ को पालघर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जनसुनवाई का आयोजन किया गया है। पूरी प्रक्रिया को संदेहस्पद बताते हुए मछुआरों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति के अध्यक्ष देवेंद्र दामोदर तांडेल ने कहा कि एनजीटी में वैâविएट दायर करके जेएसडब्ल्यू यह सुनिश्चित करना चाहता है कि एनजीटी उन्हें पहले सूचना दिए बिना कोई स्थगन या निरोधक आदेश जारी न कर सके। इससे यह साफ हो जाता है कि कंपनी स्थानीय मछुआरा समुदाय द्वारा की जा रही वैध आपत्तियों को लेकर आशंकित है।
