– महायुति सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रदेश के बड़े शहर पुणे की मेट्रो परियोजना में भाजपा के लोगों ने १२ हजार करोड़ रुपए का गबन किया है। चार-पांच लोगों ने मिलकर मलाई खाई है, ऐसा गंभीर आरोप शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद संजय राऊत ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुणे प्रशासन की तीन टोलियों ने गबन किया हुआ पैसा आपस में बांट लिया है। इन भ्रष्टाचारी टोलियों का मुखिया फिलहाल पुणे में राज कर रहा है। सांसद संजय राऊत कल पुणे दौरे पर थे।
पुणे चला रहीं तीन टोलियां
इस दौरान उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र में एक टोली चला रहे हैं। उन्होंने अपने एक खास आदमी को पुणे पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी दे रखी है, वहीं नगर विकास मंत्री की एक टोली है, उसमें अपना आयुक्त बैठा रखा है। इसी तरह अजीत पवार यानी कि तीसरी टोली ने अपना जिलाधिकारी बना रखा है। ये तीनों टोली पुणे को चला रही हैं। कलेक्शन के लिए हर टोली ने अपना एक सूबेदार नियुक्त कर रखा है।
पुणे के पुलिस आयुक्त कर रहे हैं
भाजपा कार्यकर्ता के
रूप में काम! -सांसद संजय राऊत
पुणे मेट्रो परियोजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। इस तरह का आरोप शिवसेना सांसद संजय राऊत ने लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आश्चर्य इस बात का है कि पुणे पुलिस आयुक्त एक अधिकारी नहीं, बल्कि भाजपाई कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए दिखाई पड़ते हैं। मुंबई पुलिस आयुक्त अकेले घूमते हैं, लेकिन पुणे के पुलिस आयुक्त गुंडों की पूरी फौज लेकर निकलते हैं, यह वर्दी का अपमान नहीं है तो और क्या है।
संजय राऊत ने कहा कि शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के पार्थिव शरीर पर रामदास कदम ने जो बयान दिया है, उसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। शिवसेनाप्रमुख पर इस तरह की बात करते हुए रामदास कदम को शर्म आनी चाहिए। शिवसेनाप्रमुख की स्थिति बेहद नाजुक थी, तभी हम चुनिंदा लोग वहां मौजूद थे। हमें पता है कि उस वक्त की स्थिति कितनी नाजुक थी, लेकिन पैसा और पद के लिए कोई कितने निचले स्तर तक गिर सकता है ये रामदास कदम ने कर दिखाया है। बालासाहेब ठाकरे के साथ काम करनेवाले सभी लोगों को उद्धव ठाकरे ने सम्मान दिया है। वे सिर्फ तालियां बटोरने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर पूरा महाराष्ट्र थूक रहा है। पैसा और पद के लिए दीवाना हुआ शख्स किसी भी तरह की बयानबाजी कर सकता है। उद्धव ठाकरे के सुख-दुख के समय ये लोग कहीं नहीं थे।
