सूफी खान
हमास इजरायल जंग के बीच सीजफायर की कोशिश इस बार अमेरिका भले ही गंभीरता से कर रहा हो, हमास भी इसके लिए काफी हद तक हामी भर चुका है, लेकिन हमास के लीडर्स को आगे तक महफूज रखने के लिए कतर ने एक ऐसी चाल चल दी है जिसमें इजरायल फंस गया है। जी हां वो कतर जिस पर इजरायल ने ये कहते हुए हमला कर दिया था कि उसके यहां हमास लीडर शरण लिए हुए हैं। वो कतर जिसे अमेरिका और इजरायल ने ही मध्यस्थता की जिम्मेदारी सौंपी थी। उसी कतर के रिहाइशी इलाके पर हमला करके इजरायल ने रेड लाइन पार कर दी थी। इसके बाद कतर और बाकी अरब, मुस्लिम देशों का रुख देखकर इजरायल के पक्के दोस्त अमेरिका को भी समझ आ गया कि अब पानी सिर से ऊपर निकल चुका है। वैसे भी कतर अमेरिका के लिए बहुत मायने रखता है…सऊदी और दूसरे अरब देशों से ज्यादा कतर में अमेरिकी फौज और साजो सामान है।
अमेरिका की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कतर ने भी वो दांव खेला कि इजरायल चाह कर भी अब हमास के नेताओं को निशाना नहीं बना पाएगा। कतर के तेवर देखकर सबसे पहले तो प्रेसिडेंट ट्रंप ने इजरायल के पीएम नेतन्याहू से कतर के अमीर को माफी का फोन कराया। जिसमें पीएम नेतन्याहू ने उनसे क्षमा मांगी और आगे इस तरह की हरकत दोबारा नहीं होगी इसका भरोसा दिया।
कतर ने अमेरिका पर दबाव बनाया..इसके बाद प्रेसिडेंट ट्रंप ने सीधे एक ऑर्डर निकाला जिसके मुताबिक, अमेरिका का रिश्ता कतर के साथ नाटो देशों की तरह होगा। अगर कतर पर कोई हमला करेगा तो अब अमेरिका उसे भी अपना दुश्मन मानेगा और उसके खिलाफ जंग में शामिल हो जाएगा। ट्रंप के मुताबिक, जब तक वो कुर्सी पर हैं ये समझौता लागू रहेगा। बस यहीं कतर खेल कर गया हमास के लिए। दरअसल कतर में हमास के लोग रहते हैं। वो अमेरिका और इजरायल के कहने पर ही वहां रहते हैं,ताकि जब बातचीत करनी हो किसी तरह का नेगोशिएशन करना हो तो कतर के थ्रू की जा सके।
अब अमेरिका ने कतर को लिखित गारंटी दे दी है कि उसके ऊपर कोई हमला नहीं होगा। कतर की वजह से वहां रह रहे हमास को भी ये गारंटी मिल गई कि कतर में रह रहे उसके नेताओं पर भी कोई हमला नहीं होगा। तो अमेरिका ने कतर के साथ समझौता करके एक तरह से हमास को भी ये गारंटी दे दी कि आपके लोग जो कतर में रह रहे हैं उन पर भी अब हमला नहीं होगा। तो एक तरह से कतर ने अपने साथ साथ हमास के लोगों को भी महफूज कर लिया है, इजरायल की किसी भी आक्रामकता से।
