मुख्यपृष्ठस्तंभपूर्वांचल पॉलिटिक्स : ओबीसी आरक्षण बंटवारा... राजभर ने बढ़ाया सियासी पारा!

पूर्वांचल पॉलिटिक्स : ओबीसी आरक्षण बंटवारा… राजभर ने बढ़ाया सियासी पारा!

हिमांशु राज

ओमप्रकाश राजभर ने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू करने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि राज्य में ओबीसी के २७ फीसदी आरक्षण का वास्तविक लाभ सभी वर्गों तक नहीं पहुंच पा रहा है। दरअसल, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण का ज्यादा फायदा केवल कुछ मजबूत जातियों को ही मिल रहा है, जिसकी वजह से अति पिछड़े और सर्वाधिक पिछड़े वर्ग अब तक वंचित रह गए हैं। इसी समस्या का समाधान करने के लिए राजभर ने मांग की है कि २७ फीसदी आरक्षण को तीन हिस्सों में बांट दिया जाए। पिछड़ा वर्ग को ७ फीसदी, अति पिछड़ा वर्ग को ९फीसदी और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को ११ फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे वंचित वर्गों को विकास की धारा में बराबरी का अधिकार मिल सकेगा।
राजभर ने भाजपा, कांग्रेस बसपा, सपा, आरजेडी, निषाद पार्टी और अपना दल समेत अनेक दलों के अध्यक्षों को पत्र लिखकर अपनी राय स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि अब समय आ गया है, जब सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू किया जाए ताकि आरक्षण का लाभ सही मायनों में उन लोगों को मिल सके, जिनका हक अब तक दूसरे लोग ले गए। राजभर की इस मांग के समर्थन में प्रदेश के कई पिछड़े नेताओं और समाज के भीतर एक नई लामबंदी देखने को मिल रही है, जिससे जातिगत राजनीति फिर से चर्चा में है। उत्तर प्रदेश में २०२७ में विधानसभा चुनाव होने हैं और इससे पहले ओमप्रकाश राजभर की यह पहल राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल रिपोर्ट लागू करने की नहीं है, बल्कि हर उस वंचित वर्ग की आवाज उठाने की है, जिनको अब तक समाज में पीछे धकेल दिया गया है। राजभर ने इसे सामाजिक न्याय की नई ललकार बताते हुए कहा है कि अब अन्याय का दौर खत्म होगा और हिस्सेदारी का दौर शुरू होना चाहिए। उनकी मांग पर चर्चाओं का सिलसिला तेज है, अब देखना है कि अन्य राजनीतिक दल उनका साथ देते हैं या इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहते हैं। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में जातीय आरक्षण और राजनीतिक ध्रुवीकरण को फिर से केंद्र में ला दिया है।

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