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संपादकीय : सत्य का मोर्चा…क्रांति लाएगा!

किसी को भी इस बात पर संदेह करने की कोई वजह नहीं है कि भारत का चुनाव आयोग पूरी तरह से भंगार में डालने लायक हो गया है। कोई भी हमारे चुनाव आयोग की मूर्खता और लाचारी के मामले में हाथ नहीं पकड़ सकता। जब भारतीय लोकतंत्र के पतन का इतिहास लिखा जाएगा, तो चुनाव आयोग पहरेदारों की सूची में सबसे ऊपर होगा। लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले इन पहरेदारों के खिलाफ आज मुंबई में एक सर्वदलीय विराट मोर्चा निकाला जाएगा। यह मोर्चा दिल्ली के बेकाबू चुनाव आयोग को हिला देगा। संयुक्त महाराष्ट्र संघर्ष के बाद, राज्य के सभी दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक दिल से एकजुट हो गए हैं। अब पता चलेगा कि महाराष्ट्र का क्या प्रभाव है। ईवीएम से लेकर मतदाता सूची तक हर जगह घोटाले हो रहे हैं। उन्हीं घोटालों की मदद से मोदी और उनकी वर्तमान भाजपा २०१४ से चुनाव जीत रही है। भारतीय चुनाव प्रक्रिया में जहर घोलने की साजिश पहले भी हुई है, लेकिन अब जो किया जा रहा है वह कल्पना से परे है। हमारे वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त मंत्रालय में गृह मंत्री अमित शाह के सहयोगी थे और शाह ने उस आदमी को चुनाव आयोग का सूत्रधार बना दिया और भारत के सभी चुनावों का सत्यानाश कर दिया। महाराष्ट्र में लोकसभा से विधानसभा तक के छह महीने के अंतराल में ६० लाख मतदाता बढ़े। यह वैâसे संभव है कि सभी ने एक साथ भाजपा को वोट दिया? हजारों डुप्लीकेट मतदाता, फर्जी मतदाता, मृतकों के नाम मतदाता सूची में डालकर उनसे वोट डलवाना और चुनाव जीतना, भाजपा का ‘गुजरात पैटर्न’ देश को गर्त में धकेलता दिख रहा है। हर घर में १०० से २००० मतदाता पंजीकृत हैं और यह भाजपाई कतार में खड़े होकर ऐसे वोट देते हैं जैसे महाराष्ट्र का दामाद हो। आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा के मतदाता
सूची घोटालों
का पर्दाफाश किया। नई मुंबई पालिका आयुक्त के सरकारी बंगले में १२७ मतदाताओं का पंजीकरण हुआ है। नई मुंबई के इस सरकारी बंगले में सवा सौ कौरवों को जन्म देनेवाले धृतराष्ट्र और गांधारी कौन हैं? इसका पता लगाकर कार्रवाई करने की सद््बुद्धि महाराष्ट्र के चुनाव आयोग को नहीं आ रही है। नासिक में साढ़े तीन लाख डुप्लीकेट मतदाता हैं। केवल दिव्या में ही १७ हजार डुप्लीकेट मतदाता दर्ज हैं। जब विधानसभा के हर क्षेत्र और महापालिका के हर वार्ड में ऐसा घोटाला है, तो ऐसी मतदाता सूची पर चुनाव कैसे लड़े जाएं? अब चुनाव आयोग ने एक चालाक तरकीब निकाली है कि डुप्लीकेट नाम वाले मतदाताओं के नाम के सामने दो तारों (दो स्टार) का निशान लगाएगा। कहा गया है कि इससे ये मतदाता दो या अधिक बार मतदान नहीं कर पाएंगे। उनसे यह शपथपत्र भी लिया जाएगा कि वे दो बार वोट नहीं डालेंगे। शपथपत्र लिखकर लेना यह पुराना तरीका है। लेकिन यह आदेश सिर्फ दिखावा मात्र ही है। लाखों डुप्लीकेट मतदाताओं से ऐसा शपथपत्र लेना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसलिए डुप्लीकेट मतदाता वहीं के वहीं बने रहेंगे। हमारी जानकारी के अनुसार, यदि एक्सेल फाइल सिस्टम का उपयोग किया जाए तो चुनाव आयोग की अपनी कंप्यूटर मशीनों पर ही डुप्लीकेट नाम आसानी से हटाए जा सकते हैं और फिर शपथपत्र की कोई जरूरत ही नहीं रहेगी। देश में मोदी सरकार आने के कुछ समय बाद से जिला चुनाव शाखा में यह एक्सेल सुविधा बंद होती गई, जिससे उन्हें अपने कंप्यूटर पर डुप्लीकेट मतदाता दिखाई नहीं देते हैं। इस प्रकार चुनाव आयोग जनता को मूर्ख बना रहा है। राज ठाकरे ने भी कहा है कि चुनाव परिणाम का मैच फिक्स है। मतदाता सूचियों के घोटाले के साथ-साथ ईवीएम को भी दुर्लक्ष नहीं किया जा सकता है। मतदान सूची के
स्वच्छ होने के बाद
जो भी जीते, हमें वह स्वीकार होगा। रोहित पवार पर डोनाल्ड ट्रंप के लिए फर्जी वोटर कार्ड बनाने का मामला दर्ज किया गया है। फिर हमारी मतदाता सूची में लाखों फर्जी नाम डालने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? मोदी अपनी एमए और बीए की डिग्री नहीं दिखाते और चुनाव आयोग डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने को तैयार नहीं है। यह सब गोलमाल है। देश में लोकतंत्र को जिंदा रखना जरूरी है। लोकतंत्र की वजह से ही भारत अन्य देशों से अलग और विशिष्ट है। इस देश के नागरिकों के पास एक ही अधिकार है और वह है वोट का अधिकार। पिछले दस वर्षों में इसी अधिकार की चोरी की गई है। वोट का अधिकार भारतीय संविधान ने दिया है। यह कोई भाजपा की मेहरबानी नहीं है इसलिए इस अधिकार के लिए जनता को संघर्ष करना पड़ेगा। जिस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर देश के मुख्य राजनीतिक दलों का भरोसा नहीं रहा, उसके हाथों चुनाव कराने की कमान देना राष्ट्रद्रोह जैसा अपराध है। चुनाव आयोग को राजनीतिक संलिप्तता से दूर रहना चाहिए, पर वर्तमान चुनाव आयोग राजनीतिक खेल का वजीर बन गया है। यदि हमारा चुनाव आयोग लोगों के सम्मान और विश्वास के योग्य नहीं रहा, तो ऐसे आयोग को भंगारखाने में फेंकने का यही सही समय है। महाराष्ट्र के सभी दल इसके लिए एकजुट हो चुके हैं। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के मामले में किसी को कोई संशय नहीं है। जो भी कीमत चुकानी पड़े, हम चुकाएंगे और लोकतंत्र बचाएंगे, संविधान बचाएंगे। सत्य ही भारतीय संविधान की आधारशिला है। उस सत्य के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ यह विशाल मोर्चा क्रांति लाएगा!

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