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किसानों को छलने का खेल बंद करो… तुरंत कर्जमुक्त करो!.. महायुति सरकार पर बरसे उद्धव ठाकरे

सामना संवाददाता / मुंबई

चुनाव से पहले किसानों को कर्जमाफी का वादा करनेवाली महायुति सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों को सिर्फ अटकाने और उलझाए रखने का काम किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ३० जून २०२६ तक किसानों को कर्जमाफी देने की घोषणा की है। इस पर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसानों को छलने का खेल बंद करो। अभूतपूर्व संकट में फंसे किसानों को और मत उलझाओ, उन्हें तुरंत कर्जमुक्त करो।
मुख्यमंत्री फडणवीस की कर्जमाफी की घोषणा पर उद्धव ठाकरे ने कल तीखी प्रतिक्रिया दी।
किसानों को मौत के दरवाजे पर धकेल रही है सरकार!

शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि कर्ज के पहाड़ के नीचे दबा किसान टूट चुका है, प्रकृति कोप कर रही है और इस पर असंवेदनशील सरकार का तुगलकी कारभार जारी है। आसमानी और सुल्तानी संकट में फंसे किसानों को सरकार ने एक बार फिर कर्जमाफी का झूठा भरोसा देकर समय काटने की कोशिश की है।
किसानों के खाते में मुआवजे के कितने पैसे जमा हुए?
अन्य मदद करने से पहले किसान अपनी बर्बाद हुई जमीन फिर से उपजाऊ बनाने के लिए मिट्टी मांग रहा है, लेकिन इस पर सरकार कुछ भी करने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा कि दुनिया का पेट भरनेवाला किसान आज भयंकर संकट में फंसा है। बारिश अभी भी उसका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। सरकार ने हजारों करोड़ के मुआवजे की घोषणा की, लेकिन किसानों के खातों में कितना पैसा जमा हुआ, यही सबसे बड़ा सवाल है। इस तरह का तीखा सवाल उद्धव ठाकरे ने उठाया। किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं पर भी उद्धव ठाकरे ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र से लगातार किसानों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हैं। आत्महत्याओं के ये बढ़ते आंकड़े सरकार के कानों तक नहीं पहुंचते क्या?
आत्महत्याओं की कौन लेगा जिम्मेदारी?
सरकार कहती है कि जून तक कर्जमाफी होगी, तो क्या जून तक होने वाली किसानों की आत्महत्याओं की जिम्मेदारी सरकार लेगी? सरकार किसानों के साथ खेल रही है। संक्षेप में कहें तो किसानों की वर्तमान पीड़ा वैसी ही बनी रहेगी। कुल मिलाकर ‘अभी आवाज मत उठाओ’, यही सरकार का संदेश है।
मुख्यमंत्री फडणवीस इन सवालों के जवाब कौन देगा?
जब किसानों की दयनीय हालत सामने है, तब आपकी विदेशी समिति किस तरह का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी?
अगर अगले साल जून में सच में कर्जमाफी होनी है तो मौजूदा कर्ज की किस्तें अभी भरनी चाहिए क्या?
अगर उन किस्तों को भी जून में माफ किया जाएगा तो अभी क्यों भरें?
अगर किसान किस्तें नहीं भरते, तो क्या उन्हें रबी सीजन के लिए नया कर्ज मिलेगा?
अगर नया कर्ज मिलेगा तो क्या वह भी माफ किया जाएगा?

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