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सिंहस्थ कुंभ में टेंडर घोटाला… १५-२५ फीसदी कमीशन के बिना नहीं मिलता काम!

– मंत्री के सामने ही फूटा २,२०० करोड़ का क्लब टेंडरिंग का बम

-ठेकेदार ने मंत्री भोसले को दी खुली चुनौती

-कहा, सबूत के साथ बोल रहा हूं, साबित नहीं कर सका तो कोई भी सजा दो

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

नासिक में होनेवाले सिंहस्थ कुंभ मेले में २,२०० करोड़ रुपए के टेंडर घोटाले ने तब राजनीतिक भूचाल ला दिया है, जब एक स्थानीय ठेकेदार ने निर्माणकार्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के सामने ही क्लब टेंडरिंग की पोल खोल दी। ठेकेदार रणजीत शिंदे ने मंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि मैं सबूत के साथ बोल रहा हूं। अगर साबित नहीं कर सका तो कोई भी सजा दे दो। यह विवाद तब भड़का जब ठेकेदार ने पत्रकारों की मौजूदगी में ही १५-२५ फीसदी कमीशनखोरी की मांग वाली क्लब टेंडरिंग प्रथा का भंडाफोड़ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े ठेकेदार काम लेते हैं और फिर सब-टेंडर के जरिए छोटे ठेकेदारों से कमीशन पर काम करवाते हैं। मंत्री भोसले इस खुलासे से स्पष्ट तौर पर बेचैन दिखे और उनका डैमेज कंट्रोल भी विफल रहा।
तैयारियों की तह में भारी भ्रष्टाचार
ठेकेदार के सवालों के जवाब में मंत्री केवल इतना कह सके कि आने वाले ५७० करोड़ रुपए के नए टेंडर में छोटे ठेकेदारों को मौका दिया जाएगा, लेकिन यह आश्वासन ठेकेदारों को संतुष्ट नहीं कर सका। यह घटना सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों में गहरे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है और सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के गंभीर संकट को उजागर करती है।
कुंभ मेले में कार्यों के ठेकों को लेकर बढ़ा विवाद
नासिक में वर्ष २०२७ में लगनेवाले सिंहस्थ कुंभ मेले में कार्यों के ठेकों को लेकर विवाद बढ़ने लगा है। बताया जा रहा है कि कुंभ मेले के लिए इस बार अत्यधिक खर्च किया जा रहा है। इसी का हिस्सा बनाते हुए दो हजार दो सौ करोड़ रुपए के टेंडर निकाले गए हैं। इन टेंडरों को लेकर विवाद सीधे निर्माणकार्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले तक पहुंच गया।
नासिक के ठेकेदारों की असहमति रणजीत शिंदे ने मंत्री के समक्ष व्यक्त की। शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार ने दो हजार दो सौ करोड़ रुपए के टेंडर निकाले हैं। ये टेंडर क्लब किए गए हैं इसलिए छोटे ठेकेदार इनमें भाग नहीं ले पाए। इन कार्यों में नासिक के ठेकेदारों को जानबूझकर दरकिनार किए जाने की भावना है। शिंदे ने कहा कि बड़े ठेकेदार काम लेते हैं। फिर उसका सब-टेंडरिंग करते हैं। पंद्रह से पच्चीस प्रतिशत काम अन्य लोग करते हैं। फिर सरकार उन्हें क्यों दरकिनार कर रही है? इन ठेकेदारों के सामने गंभीर कठिनाइयां होने पर भी उन्हें क्यों फंसाया जा रहा है? इस तरह के आक्रामक सवाल ठेकेदार शिंदे ने किया। इस दौरान क्लब टेंडर में काम के लिए कमीशनखोरी का मुद्दा रखते हुए ठेकेदार शिंदे ने कहा कि मैं स्पष्ट और सबूत के साथ बोल रहा हूं कि जो बोलता हूं, वह साबित करके दिखाऊंगा।

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