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कहीं खुशी कहीं गम…आरक्षण ने कइयों की तोड़ी उम्मीदें…आरक्षित वार्डों में छाया सन्नाटा

सगीर अंसारी / मुंबई

महानगरपालिका चुनाव के लिए हुए आरक्षण के नतीजे घोषित होते ही शहर का सियासी माहौल पूरी तरह बदल गया। कहीं पर जश्न का माहौल नजर आया तो कहीं मायूसी छा गई। लंबे समय से नगरसेवक बनने का सपना देखने वाले कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के अरमानों पर इस आरक्षण ने पानी फेर दिया। वहीं कुछ के लिए यह दिन उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी खुशखबरी लेकर आया। राजनीतिक गलियारों में सुबह से ही चर्चा का दौर शुरू था। कई नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ उत्सुकता से नतीजों का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही लिस्ट जारी हुई, कई इलाकों में पटाखे फूटने लगे, तो कुछ जगहों पर गहरा सन्नाटा फैल गया।
सबसे ज्यादा असर मुस्लिम बहुल गोवंडी में देखा गया। गोवंडी, शिवाजी नगर, बैगनवाडी और आसपास के वार्डों में कई दावेदारों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। गोवंडी क्षेत्र के अधिकांश वार्डों के ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने से यहां के राजनीतिक दलों के कार्यालयों में सन्नाटा पसर गया। कई नेताओं के चेहरों पर निराशा साफ झलक रही थी। वहीं इशान्य मुंबई के कुछ हिस्सों में जब कई आरक्षित वार्ड खुले घोषित हुए, तो उम्मीदवारों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। इन वार्डों में देर शाम तक पटाखे फूटते रहे और मिठाइयां बांटी गईं।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इस आरक्षण ने आने वाले चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। अब दलों को नए चेहरे तलाशने होंगे और पुरानी रणनीतियों में भी फेरबदल करना पड़ेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरक्षण की इस नई तस्वीर में किसका सितारा बुलंद होता है और किसके सपने फिर से अगले चुनाव तक टल जाते हैं।

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