राधेश्याम सिंह
वसई। वसई विरार शहर में प्लास्टिक थैलियो पर प्रतिबंध लागू हुए कई साल बीत चुके हैं,लेकिन हकीकत यह है कि वसई विरार शहर के हर गलियों,बाजारों और दुकानों में प्लास्टिक आज भी खुलेआम बिक रहा है। वसई विरार मनपा भले ही अपने रिकॉर्ड में कार्रवाई और जुर्माने के आंकड़े बता रही हो,लेकिन वास्तविक स्थिति उसके दावों को पूरी तरह झूठा साबित कर रही है। वसई विरार मनपा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले दस महीनों में 13,921 किलो प्लास्टिक जब्त किया गया और 4,92,500 रुपये का जुर्माना वसूला गया। घनकचरा विभाग ने 2,406 दुकानों की जांच करके 136 दुकानों पर कार्रवाई किया ।
लेकिन वसई विरार शहर की जमीनी स्तर पर तस्वीर बिल्कुल विपरीत है। शहर के हर दुकान ,ठेले, भाजीवाले, फल विक्रेता के पास जाकर देख लीजिए, प्लास्टिक की थैलियां धड़ल्ले से बिक रही हैं, ऐसे लगता है कि जैसे किसी भी प्रकार का प्लास्टिक पर प्रतिबंध है ही नहीं।प्लास्टिक की वजह से गटरजाम,नालियां जाम,पानी जमाव, समुद्र किनारे कचरे के ढेर,तालाबों के आसपास प्लास्टिक थैली फेका हुआ दिखाई देगा और जिससे गंदगी का साम्रज्य दिखता है। लेकिन मनपा के आरोग्य विभाग मानो गहरी नींद में सो रहा है। बाजारों और स्टेशनों के आसपास प्लास्टिक कचरे का ढेर लगा रहता है। लोग बचा हुआ खाना प्लास्टिक में भरकर फेंक देते हैं, जिसे जानवर खाना खाने के चक्कर में प्लास्टिक उनके शरीर में चला जाता है। कई बार इसकी वजह से जनवरी की मौत का कारण भी बनता है, लेकिन मनपा के अधिकारियों को कोई परवाह नहीं! शहरवासियों का कहना है कि प्लास्टिक पर कार्रवाई सिर्फ “दिखावे के लिए”मनपा द्वारा की जाती है।
अगर सच में कड़ाई होती तो शहर में प्लास्टिक की थैलियां इस तरह खुलेआम न बिकतीं। “महा नगरपालिका सिर्फ जुर्माना वसूलने के आंकड़े दिखाती है,लेकिन प्लास्टिक के असली सप्लायरों और दुकानदारों पर बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं करती ? !”क्या पालिका का प्लास्टिक विरोधी अभियान सिर्फ कागजों पर है ? क्या मनपा विभाग की लापरवाही के वजह से प्लास्टिक माफिया बेखौफ होकर कारोबार चला रहे हैं ? क्या जुर्माना वसूली सिर्फ मनपा के अधिकारियों का ‘कमाई का जरिया’ बन गई है ? नागरिकों का साफ साफ कहना है कि प्लास्टिक थैलियो पर छापेमारी बढ़ाओ, सप्लाई चेन तोड़ो, और सुस्त अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करो। वरना प्लास्टिक पर प्रतिबंध सिर्फ कागजो पर ही सीमित रह जायेगा।
