-शर्तें मानकर रिश्ते सुधार रहा भारत
-सरकारी टेंडर में ड्रैगन की एंट्री पर भड़के विशेषज्ञ
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
चीन के साथ अपने संबंध सुधारने के लिए भारत उसकी शर्तें मान रहा है। इतना ही नहीं, भारत ने चीन की ४ कंपनियों को हमारे सरकारी टेंडर में बोली लगाने की इजाजत भी दे दी है। ये दावा करते हुए मशहूर जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने केंद्र की मोदी सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं।
ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि चीन की तरफ से चुपके से इलाके पर कब्जा करने की कोशिशों के बाद सैनिकों के आमने-सामने आने और झड़पों की वजह से पांच साल तक रिश्ते ठंडे रहे। अब भारत बीजिंग के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहा है। ऐसा ज्यादातर चीन की शर्तों पर हो रहा है। इस प्रक्रिया में भारत पूर्वी लद्दाख में २०२० से पहले वाली स्थिति (स्टेटस-क्वो) बहाल करने की अपनी मांग को असल में छोड़ रहा है।
चीनी कंपनियों पर बीजिंग का कंट्रोल
चीनी कंपनियों का जिक्र करते हुए ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि अपने हालिया कदम में मोदी सरकार ने चार चीनी कंपनियों को अगले २ सालों में भारतीय सरकारी टेंडरों के लिए सीधे बोली लगाने की इजाजत दी है। ये टेंडर पब्लिक-सेक्टर के पावर इंप्रâास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। चीनी कानून के तहत बीजिंग का इन चारों कंपनियों पर आखिरी रेगुलेटरी और पॉलिटिकल कंट्रोल रहता है, चाहे वे सरकारी हों, पब्लिकली लिस्टेड हों या प्राइवेट हों।
विशेषज्ञ ने उठाए सवाल
यूरोपी देशों की बात करते हुए चेलानी ने कहा कि कई पश्चिमी देशों ने अपने अहम पावर ग्रिड को चीनी दखल से बचाने के लिए कदम उठाए हैं। उन्हें डर है कि ऐसी पहुंच से कोई दुश्मन देश जियोपॉलिटिकल संकट के समय ‘किल स्विच’ का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रिकल ग्रिड के कुछ हिस्सों को ठप या बेकार कर सकता है।
भारत हो रहा चीन पर निर्भर
चेलानी ने आगे कहा कि यह अजीब विडंबना है। २०२० में चीन की घुसपैठ के बाद, भारत ने चीन से अलग होने की कोशिश की थी। अब, उस साल लगाई गई पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाकर, भारत चीनी सप्लाई चेन पर और ज्यादा निर्भर होता जा रही है, जिससे भारत के साथ चीन का द्विपक्षीय व्यापार सरप्लस (व्यापार में बढ़त) लगातार बढ़ रहा है। यह सरप्लस अब भारत के पूरे सालाना रक्षा बजट से भी ज्यादा हो गया है।
