मुंबई-कोकण सहित राज्य में पिछले दो-चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने सत्ताधारियों के दावों की पूरी तरह पोल खोल कर रख दी है। मुंबई की नाला-सफाई से लेकर राज्य की ‘तेज रफ्तार’ प्रगति के बारे में उनके किए गए दावों को कुदरत ने खोखला साबित कर दिया है। मुंबई-पुणे ‘मिसिंग लिंक’ का राज्य सरकार ने भारी ढिंढोरा पीटा था, लेकिन यह मिसिंग लिंक भी पहली ही बारिश की मार में ठप हो गया। इन लोगों ने जिस तेज रफ्तार सफर की बड़ी-बड़ी बातें की थीं, वे सोमवार सुबह मिसिंग लिंक में आई दरार से गिरे झरने के पानी में बह गईं। इस हादसे का क्या मतलब निकाला जाए? जब भी ऐसा कुछ होता है, कुदरत की तरफ उंगली उठाकर खुद हाथ खड़े कर लेना और अपनी गलतियों-कमियों पर पर्दा डाल देना; राज्य के सत्ताधारियों का यही रवैया रहा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधानसभा में वही किया। उन्होंने इस हादसे का ठीकरा कुदरत पर फोड़ दिया। ‘प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी, लेकिन बारिश की स्थिति उम्मीद से ज्यादा गंभीर होने के कारण यह सब हुआ’, ऐसी लीपापोती मुख्यमंत्री ने की। यह उनकी हमेशा की स्टाइल बन चुकी है। इसी
मिसिंग लिंक
पर कुछ जगहों पर पड़े गड्ढे हाल ही में चर्चा में आए थे। उस पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया था। उस पर ठोस और तार्किक स्पष्टीकरण देने के बजाय मुख्यमंत्री ने ‘यह सब इंजीनियिंरग तकनीक है’, ऐसा अजीबोगरीब ‘तर्क’ देकर उन गड्ढों को भर दिया। यह आपका महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, लेकिन इसके उद्घाटन के महज दो महीने के भीतर ही आप पर लीपापोती करने की नौबत क्यों आई? ‘समृद्धि महामार्ग’ को लेकर भी इन लोगों ने ऐसा ही ढिंढोरा पीटा था, लेकिन उसके भी ‘वैश्विक स्तर’ के दावों के परखच्चे पहली ही बारिश ने उड़ा दिए। इस महामार्ग पर गड्ढे और दरारें आना तो अब रोज की बात हो गई है। यहां के छोटे गड्ढों की मरम्मत के लिए सरकार को २४ घंटे काम करने वाले विशेष दस्ते की घोषणा करनी पड़ी। क्या इसे ‘समृद्धि’ के वैश्विक स्तर का प्रमाणपत्र समझा जाए? मुंबई मेट्रो के दो रूटों पर रविवार को छत टपकने के मामले सामने आए। छत से पानी टपकने के कारण प्रशासन को नीचे बाल्टियां लगानी पड़ीं। पिछले साल पहली ही बारिश ने मुंबई मेट्रो के अंडरग्राउंड मार्ग की पोल खोली थी। भूमिगत स्टेशनों में झरने की तरह पानी गिर रहा था। हर तरफ कीचड़ जमा था। हर मामले में सत्ताधारी
वैश्विक स्तर की डींगें
हांकते हैं। लेकिन इन दावों की कलई पहली ही बारिश में पूरी तरह उतर जाती है। यह हर साल होता है। मुंबई की नाला-सफाई हो या बारिश से पहले के अन्य काम, उनका स्याह चेहरा भी पहली ही बारिश में सामने आ गया। खुले मैनहोल और गिरे हुए पेड़ों के कारण इस साल भी छह-सात बेगुनाहों की जान चली गई। मुख्यमंत्री फडणवीस के समर्थक उन्हें ‘इंप्रâा-मैन’ वगैरह कहते हैं। इसके लिए वे समृद्धि महामार्ग से लेकर मेट्रो रेलवे, अटल सेतु, शक्तिपीठ महामार्ग, वधावन बंदरगाह, चौथी मुंबई, नई मुंबई हवाई अड्डा और मिसिंग लिंक जैसी एक लंबी-चौड़ी फेहरिस्त गिनाते हैं। लेकिन इस हर एक गुब्बारे में वक्त-वक्त पर सुई चुभी है और इसके वैश्विक स्तर के दावों की हवा निकल चुकी है। सोमवार को मिसिंग लिंक के गुब्बारे को भी वहां पड़ी दरार ने फोड़ दिया। इसके लिए खर्च हुए कुछ हजार करोड़ रुपए वहां के झरने के पानी में बह गए। महाराष्ट्र के स्वयंभू ‘इंप्रâा-मैन’ के दावे कभी ‘समृद्धि’ के गड्ढों में दफन हो जाते हैं, तो कभी ‘मिसिंग लिंक’ के झरने में बह जाते हैं। इसलिए राज्य की जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है,‘यह वैâसे इंप्रâा-मैन?’
