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समावेशी भारत में मानिसक दिव्यांग व्यक्तियों की पारिवारिक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

उमेश गुप्ता / वाराणसी

विश्व दिव्यांग दिवस पर देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर द्वारा आयोजित सप्ताहव्यापी कार्यक्रम के तहत 5 दिसम्बर शुक्रवार को कमच्छा स्थित देवा केंद्र के प्रांगण में समावेशी भारत में मानिसक दिव्यांग व्यक्तियों की पारिवारिक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी गयी।

इस कार्यक्रम के मुख्य पेरिस फ्रांस से पधारे मुख्य अतिथि श्री जे मैक्स कैसल एवं उनकी पत्नी श्रीमती एलिजाबेथ थी। इनके अलावा संगोष्ठी में यूपी कॉलेज की राजनीति विभाग की प्रोफेसर अलका गुप्ता, वरिष्ठ शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ दीपिका दास, मनी मेमोरियल सोसायटी के अध्यक्ष दो नील, प्रेम ज्योति इंटीग्रेटेड स्कूल के अध्यक्ष श्री पवन कुमार, शहर के प्रमुख फिजिशियन एवं डायबिटीज के एक्सपर्ट डॉ नीरज खन्ना के साथ ही अभिभावक स्पेशल एजुकेशन टीचर्स एवं अन्य संस्थाओं के लोग शामिल हुए।संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ मनोचिकित्स व मनोवैज्ञानिक डॉक्टर तुलसी ने किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर तुलसी ने सभी लोगों से आग्रह किया की मानसिक दिव्यांग बच्चों और वयस्कों के समस्याओं को वाराणसी के संदर्भ में जरूर अवगत कराया जाए। जिनका निचोड़ इस संगोष्ठी के उपरांत वाराणसी के डीएम दिव्यांग कल्याण अधिकारी वाराणसी के माननीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को सदर सप्रेम एक पत्रक पेश किया जाए जिससे उनको वाराणसी में हर प्रकार के दिव्यांगों को खासकर मानसिक दिव्यांगों के संग में जो दिक्कतें हो रही हैं और उनके माता-पिता को जो दिक्कतें हो रही हैं उनके निवारण के लिए आधिकारिक तौर पर कुछ किया जा सके। गोष्ठी की शुरुआत डॉ नीरज खन्ना ने की, उन्होंने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि
काशी दीनबंधु भोले नाथ की नगरी है, भगवान शिव अपने प्रिय गणों के साथ दिव्यांग जन को भी स्थान देते हैँ अतः दिव्यांग जन भी “शिव प्रिय ” हैँ
इनका सहचर, दर्शन अप्रिय नहीं मानना चाहिये l
तदोपरांत मुख्य अतिथि फ्रांस से पधारे सामाजिक कार्यकर्ता जे मैक्स कैसल ने विदेश में दिव्यांगों के लिए किये जा रहे कार्यक्रमों के बारे में प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक स्वर से तय किया कि
1. इस प्रकार की संगोष्ठियां निरंतर होती रहनी चाहिए और वाराणसी के सभी स्वयं से संगठनों को मिलकर दिव्यांग हित से जुड़े बातों पर विचार करना चाहिए
2. मानसिक दिव्यांगता की रोकथाम हेतु वाराणसी मंडल के सभी ब्लॉकों में एवं पूरे जनपद में पूरी तीव्र गति से पल्स डिसेबिलिटी अभियान की जनचेतना कार्यक्रम पल्स पोलियो की तरह सभी संगठनों को मिलकर करना चाहिए ।

3. वाराणसी मंडल स्तर पर डीएम एवं दिव्यांग कल्याण अधिकारी तथा एनजीओ के माध्यम से एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करना चाहिए जिससे दिव्यांग या उनके माता-पिता विभिन्न जानकारियां ले सकें।

4. मानसिक दिव्यांग बच्चों के माता पिता के लिए सरकारी नौकरियों में किसी प्रकार का आरक्षण नहीं है अतः सरकार को सरकार को उनके माता-पिता को नौकरियों में वरीयता देनी चाहिए।

5. वाराणसी में बढ़ती आबादी, ट्रैफिक एवं अवरोधों के कारण दिव्यांगों को खासकर मानसिक दिव्यांगों को बहुत असुरक्षा हो रही है अतः वाराणसी के प्रमुख ट्रैफिक ट्रैफिक चौराहों पर चौराहों पर केवल ट्रैफिक पुलिस नहीं बल्कि रेड लाइन और येलो लाइन बनाने से सुरक्षा की भावना बढ़ेगी और एक्सीडेंट भी कम होंगे। और दुर्घटना से भी दिव्यांगों को बचाया जा सकता है ।

6. विभिन्न स्कूलों सार्वजनिक स्थलों जैसे गंगा जी के घाट अस्पताल बैंक मॉल एवं अन्य स्थानों को दिव्यांगों के लिए एक्सेसिबल बनाना चाहिए और उनका एक्सेसिबिलिटी ऑडिट होना चाहिए ।

7. पूरे संपूर्ण वाराणसी क्षेत्र को दो-तीन जोन में डिवाइड कर, हर एक जोन में दिव्यांग हाट होना चाहिए जहां दिव्यांग हर संडे को जाकर अपने सामानों की बिक्री कर सके और कुछ जीव कोपार्जन कर सके।

8. वाराणसी में दिव्यांगों के लिए कोई भी दिव्यांग फ्रेंडली एंबुलेंस नहीं है अतः सरकार से अनुरोध है कि कम से कम तीन चार दिव्यांग फ्रेंडली एंबुलेंस शुरू हो जो केवल दिव्यांगों के लिए हो।

9. हरिशचंद्र घाट मणिकर्णिका घाट को दिव्यांग फ्रेंडली बनाना अत्यंत आवश्यक है।

10. मानसिक दिव्यांगों को किसी प्रकार की सुरक्षा और कोई उनको प्रताड़ित न कर सके इसके लिए पुलिस प्रशासन को दिव्यांग फ्रेंडली दिव्यांग मैत्री कार्ड देना चाहिए।

11. दिव्यांगों के लिए शहर के प्रमुख चौराहा पर उनके विश्राम तथा शौच के लिए दिव्यांग फ्रेंडली टॉयलेट्स एवं होने चाहिए।

संगोष्ठी के अंत में देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर के सचिव श्री श्याम लाल पटेल ने सभी आए हुए मेहमानों को धन्यवाद दिया एवं देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर का मोमेंट तो भेंट किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में देवा केन्द्र के प्रिंसिपल रामनारायन के साथ ही देवा केंद्र के विजय पाल, प्रदीप, संजय, पूनम लाभ, मोनिका सिंह, अनुपमा श्रीवास्तवा, राजीव, साधना जायसवाल, राज, प्रमोद वर्मा, सुरेश, सूरज आदि ने अपना विशेष सहयोग दिया।

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