मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु : समय-आपकी सबसे मूल्यवान पूंजी

निवेश गुरु : समय-आपकी सबसे मूल्यवान पूंजी

भरतकुमार सोलंकी
मुंबई

क्या आपने कभी अपने दिन भर के समय का हिसाब निकाला है? शायद नहीं। लेकिन यदि नहीं किया, तो आज का यह लेख आपके लिए एक अनमोल खजाना है, ऐसा खजाना जो कहीं बाहर नहीं, आपके भीतर ही छुपा हुआ है। बस थोड़ा ठहरकर सोचिए- सुबह आंख खुलने के क्षण से लेकर रात को बिस्तर तक पहुंचने के बीच के समय में, भोजन, नाश्ता, शाम के खाने और थोड़ा-सा विश्राम, ध्यान या साधना के अलावा ऐसा कितना समय है जिसे आपने इन्वेस्ट किया? और कितना ऐसा जिसे आपने बस यूं ही वेस्ट कर दिया?
समय वह पूंजी है, जो हर व्यक्ति को समान रूप से मिलती है न किसी के पास कम और न ही किसी के पास ज्यादा। फर्क सिर्फ इस बात का पड़ता है कि कौन इसे वैâसे खर्च करता है। वास्तव में समय ही आपकी व्यक्तिगत संपदा है। जिस दिन आप इसका हिसाब रखना शुरू कर देंगे कि आज आपने कितना समय निवेश किया और कितना व्यर्थ गंवाया। उसी दिन से आपकी छुपी हुई आंतरिक संपदा वास्तविक धन में बदलना शुरू हो जाएगी।
अब प्रश्न यह है कि समय का निवेश वैâसे किया जाए? इसका उत्तर बहुत सरल है। अपने दिन की समय-सारिणी में कुछ छोटे, परंतु महत्वपूर्ण निर्णय लेकर जैसे सुबह और शाम की सैर को अपनी दिनचर्या का निश्चित हिस्सा बनाना। यदि आप रोज ट्रैवल करते हैं – ट्रेन, बस या ऑटोरिक्शा में बैठकर तो उस समय को भी निवेश योग्य बना सकते हैं, चाहे वह ध्यान हो, नई किताब पढ़ना हो या किसी कौशल को सीखने के लिए पॉडकास्ट सुनना। यह समय चाहे छोटा हो, पर प्रभाव बड़ा होता है। दफ्तर, दुकान या कार्यस्थल का समय भी तभी सार्थक बनता है जब उसमें प्रोडक्टिविटी की समीक्षा लगातार होती रहे। क्या आप वर्विंâग आवर्स का पूरा उपयोग कर रहे हैं? क्या आप जरूरी अध्ययन या मनन के लिए कुछ मिनट अलग रखते हैं? यह छोटे-छोटे प्रश्न ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। क्योंकि जब आप अपने उपयोग किए गए समय के पीछे तर्क देखने लगते हैं, तभी आपके कार्यों में मूल्य जोड़ना शुरू होता है। समय का यह निवेश धीरे-धीरे आपको एक ऐसी ‘मानव मशीन’ में परिवर्तित कर देता है, जो बिना थके, बिना रुके निरंतर मूल्य उत्पन्न करती है। यह मशीन केवल प्रतीक है। इस बात का कि यदि इंसान निरंतर अपने समय का सदुपयोग करता रहे तो धन की वर्षा अपने आप होती है, क्योंकि प्रोडक्टिविटी का परिणाम हमेशा समृद्धि ही होता है। इसलिए टाइम मैनेजमेंट सिर्फ एक कौशल नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन का सूत्र है। इससे भी महत्वपूर्ण यह कि आप प्रतिदिन कितना समय वेस्ट कर रहे है तथा कितना इन्वेस्ट। यदि यह समझ आ जाए तो सफलता बस समय की देन बन जाती है। याद रखिए, समय का सही हिसाब रखना ही असली निवेश है बाकी धन तो उसका प्रतिफल मात्र।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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