मुख्यपृष्ठअपराधस्कूल में सुरक्षित नहीं बेटियां! ...२४ छात्राओं को बनाया शिकार

स्कूल में सुरक्षित नहीं बेटियां! …२४ छात्राओं को बनाया शिकार

-शिक्षक की घृणित करतूत
-छात्राओं ने दिखाई हिम्मत

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से आई यह दिल दहला देनेवाली घटना है इसी साल जून महीने की, जब जिले के एक सरकारी स्कूल में पढ़नेवाली २४ छात्राओं ने अपने शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया। मामला सामने आते ही पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैâल गया। अभिभावक हैरान हैं और अब तक स्कूल में अपने बच्चों को भेजने से भी डर रहे हैं।
कैसे हुआ पूरा मामले का खुलासा?
यह मामला तब सामने आया जब आठवीं से दसवीं कक्षा की कई छात्राओं ने हिम्मत दिखाते हुए स्कूल के प्राचार्य को लिखित शिकायत सौंप दी। शिकायत में छात्राओं ने बताया कि शिक्षक काफी समय से उन्हें गलत तरीके से छूता था और मानसिक रूप से परेशान करता था।
उस दिन कुल २४ छात्राओं ने इस बारे में विस्तार से लिखा और प्राचार्य को सौंप दिया। प्राचार्य ने तुरंत शिकायत को स्कूल की यौन उत्पीड़न रोधी समिति के पास भेजा और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।
अभिभावकों को भी नहीं थी जानकारी
स्कूल प्रशासन के मुताबिक, सभी पीड़ित छात्राओं के अभिभावकों को एक विशेष बैठक के लिए बुलाया गया। हैरानी की बात यह रही कि अधिकांश अभिभावकों को इस बात की कोई जानकारी ही नहीं थी कि उनकी बेटियां लंबे समय से शिक्षक की हरकतों का शिकार बनी हुई थीं। यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि बच्चों को सुरक्षित महसूस कराने और उनकी बात सुनने में परिवार और स्कूल दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पुलिस ने तुरंत की कार्रवाई
पुलिस में शिकायत प्राप्त होते ही आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा ७५ (यौन उत्पीड़न) और पॉस्को अधिनियम (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह मामला बेहद गंभीर है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। यदि आगे और भी छात्राओं के बयान सामने आते हैं तो आरोपों की संख्या बढ़ सकती है।
इलाके में तनाव और आक्रोश
इस घटना के सामने आने के बाद प्ाूरे क्षेत्र में रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल जैसे सुरक्षित स्थान पर इस तरह की घृणित हरकतें बेहद शर्मनाक हैं। कई अभिभावक तो डर के कारण स्कूल में पढ़नेवाले अपने बच्चों को घर पर रखने लगे हैं। स्कूल प्रशासन ने आश्वासन दिया कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह मामला न सिर्फ स्कूल प्रशासन की सतर्कता की परीक्षा है, बल्कि इस बात की भी चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज और परिवारों को और अधिक जागरूक होने की जरूरत है।

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