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आवारा कुत्तों पर जैसे दिया ध्यान, वैसे ही वोटर लिस्ट के घपलों पर सुप्रीम कोर्ट ले संज्ञान!.. उद्धव ठाकरे का प्रतिपादन

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य में चुनावों का दौर चल रहा है, लेकिन इस चुनाव में भारी घपला हो रहा है। मुंबई सहित अन्य शहरों की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर घपले हैं। ऐसा खराब अनुभव पहले कभी नहीं हुआ। इसके बावजूद इस गड़बड़ी पर कोई बोलने को तैयार नहीं है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने जैसे आवारा कुत्तों पर ध्यान दिया, वैसे ही मतदाता सूचियों के घपलों पर भी संज्ञान लें। इस तरह का प्रतिपादन शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल किया।
‘मातोश्री’ निवासस्थान पर कल छावा स्वराज्य सामाजिक संस्था के कार्यकर्ता-पदाधिकारी और अजीत पवार गुट के पुणे के पदाधिकारियों ने शिवसेना में प्रवेश किया। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची के घपलों पर जबरदस्त तंज कसा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ३१ जनवरी तक सभी चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। लेकिन मतदाता सूचियों में भारी घपलों के कारण हमें सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करके इस मुद्दे पर ध्यान दिलाना चाहिए।
नेता विपक्ष से क्यों डरती है सरकार?
दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष का पद रिक्त होने जैसी घटना इतिहास में कभी नहीं हुई इसलिए दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति की मांग हमने एक साल पहले अधिवेशन में भी की थी। लेकिन वर्षभर में कोई कार्रवाई नहीं हुई। केवल विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। सत्ताधारी नेता प्रतिपक्ष से डरते हैं। सरकार नेता विपक्ष से डरती है। आपकी सरकार मजबूत है। दिल्ली का आपको समर्थन है। भ्रष्टाचारियों को अपनी पार्टी में लेकर उन पर आपने पर्दा डाल दिया है। फिर विपक्ष के नेता से क्यों डरते हैं? इन सवालों के साथ शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल भाजपा पर जोरदार हमला किया।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष नियुक्त नहीं करना है, तो उप मुख्यमंत्री पद भी रद्द कर दें, क्योंकि संविधान में उप मुख्यमंत्री पद का कोई प्रावधान नहीं है। फिर उनके पास तिजोरी या बाथरूम की जो भी चाबियां हैं, दे दीजिए। इस तरह का तंज भी उन्होंने कसा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र को जिंदा रखना है तो नेता प्रतिपक्ष चुना ही जाना चाहिए।
दोनों पार्टियों को निगल जाएगा ‘एनाकोंडा’
महायुति में तीन दल हैं, लेकिन वास्तव में वे एक ही दल हैं। केवल नाम और निशानियां अलग-अलग हैं। दोनों दल भाजपा की ‘बी-टीम’ हैं। उनका मालिक एक ही है, लेकिन यह एनाकोंडा दोनों दलों को निगले बिना नहीं रहेगा, क्योंकि उनकी नीति ही है। उनका लक्ष्य मुंबई मनपा पर कब्जा करना है इसलिए वे किसी भी हद तक जा रहे हैं।
…तो तड़ीपार करो!
भायंदर में एक मराठी परिवार को घर देने से मना कर दिया। खाने को लेकर या मराठी होने के कारण जातीय विवाद भड़काने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन यदि कोई मराठी व्यक्ति को घर देने से मना करेगा तो उन पर मामला दर्ज कर उन्हें तड़ीपार और जेल में डाला जाना चाहिए।

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