मुख्यपृष्ठनए समाचारज्ञान के अथाह सागर को कोटि-कोटि प्रणाम...‘चैत्यभूमि’ पर उमड़ा आस्था का जनसागर!

ज्ञान के अथाह सागर को कोटि-कोटि प्रणाम…‘चैत्यभूमि’ पर उमड़ा आस्था का जनसागर!

सामना संवाददाता / मुंबई

अपना संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण के लिए अर्पित करने वाले मनुष्य को मनुष्य के रूप में जीने का अधिकार दिलाने वाले राष्ट्रनिर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को महापरिनिर्वाण दिवस पर अभिवादन करने के लिए कल चैत्यभूमि पर श्रद्धा का विराट जनसागर उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने से आए लाखों अनुयायियों ने महामानव की स्मृति के समक्ष नतमस्तक होकर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
बाबासाहेब को आदरांजलि!
भारतीय संविधान के शिल्पकार, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के ६९वें महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि देने के लिए ५ तारीख की दोपहर से ही चैत्यभूमि के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगना शुरू हो गई थीं। देश के दूर-दराज इलाकों से परिजनों सहित पहुंचे अनुयायियों ने चैत्यभूमि पर नतमस्तक होकर अपने उद्धारकर्ता के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त की। विशेष रूप से युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं तथा बच्चों की भारी संख्या देखने में आई। बड़ी संख्या में भीमसैनिक और नागरिक सार्वजनिक तथा निजी वाहनों से चैत्यभूमि पहुंचकर अपने मुक्तिदाता को कोटि-कोटि प्रणाम कर रहे थे।
सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त
लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पुलिस विभाग ने अत्यंत सूक्ष्म व चुस्त व्यवस्था की थी। मनपा की ओर से भी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गर्इं। समता सैनिक दल सहित अनेक संस्था-संगठनों के स्वयंसेवक ने पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अनुशासन व्यवस्था में सहयोग किया। अनुयायियों ने भी शांति और अनुशासन के साथ कतारों में खड़े होकर बाबासाहेब को नमन किया।
अन्नदान और जलसेवा
अनेक संस्था-संगठनों की ओर से भीमसैनिकों और श्रद्धांजलि देने आए नागरिकों के लिए मुफ्त भोजन, पानी, चाय और खाद्य पदार्थों का वितरण किया गया। वहीं, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए गए। विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर सेवा में योगदान दिया।
नुक्कड़ नाटक से जीवंत संदेश
दिनभर कई शायरों, कलाकारों और जलसा मंडलों ने डॉ. आंबेडकर के कार्य और विचारों को जनता के सामने रखा। गांवों से आए वरिष्ठ अनुयायियों ने जलसों को देखते हुए बाबासाहेब की स्मृतियों को ताजा किया। विभिन्न संस्थाओं और मंडलों ने जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर बाबासाहेब के महान कार्यों को स्मरण किया।

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