-‘अंधों की चाय पार्टी’ का विपक्ष ने किया बहिष्कार
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की कानून-व्यवस्था और शासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए विपक्ष ने साफ कहा है कि महाराष्ट्र में आज ‘घोटालेबाजों और गुंडों का राज’ चल रहा है। सरकार उनकी खुली ढाल बनी हुई है। लाडली बहनों की सुरक्षा का ढोल पीटने वाली महायुति सरकार राज्य में बढ़ते बाल अत्याचार की घटनाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। राज्य में रोज २४ नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़ और अत्याचार के मामले दर्ज हो रहे हैं, जबकि सत्ताधारी सिर्फ बयानबाजी और समारोहों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। ऐसे माहौल में अंधों की चाय पार्टी में शामिल न होने का पैâसला लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। विपक्ष ने साफ कहा कि जो सरकार अपराधियों को बचाती है और कानून-व्यवस्था में फेल है, उसकी दावत में शामिल होना जनता के साथ विश्वासघात होगा।
बता दें कि आज से शुरू हो रहे नागपुर शीत सत्र की पृष्ठभूमि में सरकार ने परंपरा के अनुसार विपक्ष को चाय पार्टी का आमंत्रण दिया था। विपक्ष ने इसका बहिष्कार कर दिया। इस संबंध में नागपुर में विपक्षी दलों ने संयुक्त पत्रकार वार्ता कर महायुति सरकार पर जोरदार हमला किया। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि दोनों सदनों के विरोधी दल नेता का पद रिक्त है। ये दोनों संवैधानिक पद हैं। दोनों संवैधानिक पद रिक्त रखकर संविधान पर अविश्वास जताने वाले सत्ताधारियों की चाय पार्टी में जाने से हमने परहेज किया है। इसलिए हम चाय पार्टी का बहिष्कार कर रहे हैं।
सुरक्षा में सरकार विफल
‘लाडली बहन, लाडली बहन’ कहकर पीठ थपथपाने वाली सरकार का लाडली बहनों की सुरक्षा की ओर पूरी तरह से ध्यान नहीं है। राज्य में १८ वर्ष से कम उम्र की नाबालिग असुरक्षित हैं। २०२१ से २०२५ तक राज्य में छोटी बच्चियों पर अत्याचार के ३७,००० मामले दर्ज हुए हैं। रोजाना २४ नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़खानी और अत्याचार के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। लाडली बहनों की सुरक्षा करने में सरकार विफल रही है।
राज्य की तिजोरी खाली
राज्य की तिजोरी खाली हो गई है। नौ लाख ३२ हजार करोड़ रुपए का कर्ज राज्य पर आ गया है। इसमें विशेषकर राज्य की आय का बड़ा हिस्सा लगभग २२ प्रतिशत कर्ज और ब्याज चुकाने में जा रहा है। निधि वितरण में भी भारी भेदभाव हो रहा है। पूरा राज्य दिवालियापन की ओर बढ़ रहा है।
‘अध्यक्ष-सभापति करते हैं नेता विपक्ष का चयन’
नेता विपक्ष के मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इनका चयन विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति के अधिकार क्षेत्र में आता है। वे जो भी निर्णय लेंगे, वह सरकार को स्वीकार होगा। फडणवीस ने आगे कहा कि विपक्ष द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का हम उचित और संतोषजनक उत्तर देने में पूरी तरह सक्षम हैं। अधिवेशन की अवधि कम होने को लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है, लेकिन फडणवीस ने स्पष्ट किया कि शनिवार और रविवार को भी अधिवेशन की कार्यवाही चलेगी, इसलिए राज्य सरकार किसी भी सवाल से बचने वाली नहीं है।
