मुख्यपृष्ठसमाचारभारतीय सेना और प्रशासनिक सेवाओं का ऐतिहासिक साझा प्रशिक्षण सम्पन्न

भारतीय सेना और प्रशासनिक सेवाओं का ऐतिहासिक साझा प्रशिक्षण सम्पन्न

पुणे: राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच तालमेल को मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सदर्न कमांड मुख्यालय ने पुणे के औंध मिलिट्री स्टेशन स्थित मिलिट्री सिविल फ्यूजन एवं फॉरेन ट्रेनिंग नोड में छह दिवसीय संयुक्त सिविल-मिलिट्री प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया. यह कार्यक्रम 1 से 6 दिसंबर 2025 तक आयोजित हुआ, जिसमें महाराष्ट्र के भविष्य के प्रशासनिक नेतृत्व को भारतीय सेना के साथ प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला.

वानमाटी नागपुर से बैच 11-2025 के कुल 157 क्लास-II प्रोबेशनरी अधिकारियों, 48 महिला और 109 पुरुष अधिकारियों ने इस विशेष प्रशिक्षण कैप्सूल में सहभागिता की. इस पहल का उद्देश्य अधिकारियों को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, नेतृत्व मूल्यों, अनुशासन, संकट प्रबंधन एवं आपदा प्रतिक्रिया कार्यों से अवगत कराना था, जिससे उनके प्रशासनिक कौशल में समग्र विकास हो सके.

वर्तमान समय में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े खतरे, प्राकृतिक आपदाएँ और मानवीय संकट लगातार अधिक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं. ऐसे में सेना और सिविल प्रशासन के बीच तत्पर और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. इसी दृष्टि से आयोजित यह कार्यक्रम दोनों संस्थाओं के बीच विश्वास, समझ और सहयोग को नई दिशा प्रदान करता है.

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को यूनिट स्तर की गतिविधियों, युद्धक तैयारी का प्रदर्शन, नेतृत्व कार्यशालाओं, सैन्य प्रोटोकॉल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया. इस अनुभवात्मक प्रशिक्षण ने उन्हें जमीनी स्तर की परिस्थितियों को समझने में सक्षम बनाया और सैनिकों की प्रतिबद्धता एवं चुनौतियों के प्रति गहन सम्मान विकसित किया.
इस संयुक्त प्रयास ने संचार तंत्र और समन्वय क्षमता को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया, ताकि आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम हो और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सके. इससे राष्ट्रीय तैयारी और आपदा प्रबंधन के ढाँचे को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी.

यह ऐतिहासिक प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण के मिशन में भारतीय सेना और सिविल प्रशासन के बीच बढ़ते सहयोग का सशक्त प्रमाण है. भविष्य में विभिन्न जिलों और विभागों में कार्यरत होने वाले ये अधिकारी इस अनुभव को उपयोग में लाते हुए प्रशासनिक दक्षता और सुरक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
सदर्न कमांड की यह पहल आधुनिक भारत में संयुक्त नेतृत्व और रणनीतिक साझेदारी का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत करती है जो देश को आज ही नहीं, बल्कि आने वाले कल की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रही है.

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