सामना संवाददाता / मुंबई
‘भारत रत्न’ डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के ७०वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर जय भीम एक्वा सेवा समिति (रजि.) और योग गुरु राधेश्याम ने मुंबई में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्थलों पर जाकर समाज को संगठित किया और बाबासाहेब की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
योग गुरु राधेश्याम ने अपने प्रेरणादायक भाषण में विशेष रूप से महिलाओं को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का न केवल उल्लेख किया, बल्कि कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने महिलाओं को घर की चहारदीवारी से बाहर निकलने और समाज में नेतृत्व करने की वास्तविक शक्ति प्रदान की। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक संविधान को हर बच्चे तक नहीं पहुंचाया जाएगा, तब तक समतामूलक समाज की परिकल्पना अधूरी रहेगी।
अपने भाषण में योग गुरु राधेश्याम ने शिक्षा मंत्री तथा सभी स्कूलों के पदाधिकारियों से यह आग्रह किया कि देशभर के स्कूलों में ‘संविधान’ को एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए। उनका कहना था कि संविधान के ज्ञान से बच्चों की बौद्धिक क्षमता तेजी से विकसित होगी, हर नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर समझ सकेगा और महिलाओं को मिले संवैधानिक अधिकारों की समझ से महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिलेगी।
इस कार्यक्रम में योग गुरु राधेश्याम के साथ महाराष्ट्र प्रभारी एडवोकेट सुनील डोंगरे, राम सुमेर जयसवार, एडवोकेट राकेश गाडेकर, कृपाशंकर जयसवार, रामसमुझ जयसवार, राकेश कोरी, रत्नेश जयसवार, दीपक गौतम, फूलचंद जयसवार, अमित (योगा टीचर), सुनील भारती, सुरेश मास्टर, रमेश मास्टर, सचिन जयसवार और राम वैâलाश समेत अनेक प्रमुख पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
