मुख्यपृष्ठनए समाचारपड़ताल : सड़क पर उगा ‘गैरकानूनी शहर’

पड़ताल : सड़क पर उगा ‘गैरकानूनी शहर’

-क्या वाकोला प्रशासन सो रहा है?
-पाइपलाइन रोड पर जारी है अतिक्रमण

सुनील ओसवाल

वाकोला पाइपलाइन रोड-जहां कभी सड़क साफ दिखती थी, ट्रैफिक बिना झटकों के बहता था और लोग निडर होकर चलते थे। आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर कदम पर लगता है मानो सड़क किसी के कब्जे में गिरवी रख दी गई हो। साई बाबा मंदिर के पास और परम हाउस के आगे पिछले कुछ महीनों में जो कुछ हुआ है, उसने लोगों की नींद हराम कर दी है। भटक्या और बंजारा समुदाय के अस्थायी डेरों ने अब खुलेआम स्थायी बस्तियों का रूप ले लिया है और यह विस्तार इतनी बेखौफी से हुआ है कि स्थानीय लोग आज पूछने को मजबूर हैं। आखिर इस इलाके का मालिक कौन है- जनता, या यह बढ़ता अराजक तंत्र?

जिस सड़क पर रोज हजारों लोग गुजरते हैं, वही सड़क अब तिरपालों, टीन की छतों, खुले चूल्हों और कबाड़ के ढेरों की एक लंबी, बदसूरत गैलरी बन चुकी है। शाम ढलते ही यह इलाका ऐसा लगता है जैसे शहर के बीचों-बीच कोई कानूनविहीन जोन खड़ा कर दिया गया हो। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, बच्चों के स्कूल आने-जाने का रास्ता डर का गलियारा बन गया है, बुजुर्गों के लिए हर दिन एक नई परीक्षा और इस सबके बीच प्रशासन की चुप्पी पहले कभी इतनी चुभती नहीं दिखी।
लोग बताते हैं कि शुरुआत में यह अतिक्रमण दो दिन, चार दिन की कहानी बताकर बसा दिया गया था। पर जैसे-जैसे दिनों की जगह महीनों ने ली, वैसे-वैसे बस्ती बढ़ती चली गई। यह विस्तार इतना सुनियोजित और आत्मविश्वास से भरा दिखता है कि लोगों को संदेह होने लगा है कि कहीं किसी अदृश्य संरक्षण का हाथ तो नहीं? क्योंकि जिस रफ्तार से यह सड़क सिमटी है, वैसी रफ्तार से शायद ही कभी किसी विभाग ने कार्रवाई की हो।
वार्ड कार्यालयों में शिकायतें की गईं, पुलिस को सूचना दी गई, जनप्रतिनिधियों को भी बार-बार जगाया गया, लेकिन हर शिकायत एक ही किस्म के जवाब पर जा अटकती है:
देखेंगे कार्रवाई होगी और इन्हीं ‘होगी’ शब्दों में पूरा मामला घुलकर गायब हो जाता है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खामोशी है और खामोशी इतनी गहरी कि लोगों को अब भरोसा नहीं कि प्रशासन इस समस्या को समस्या मानता भी है या नहीं।
इलाके के नागरिक कहते हैं कि यह सिर्फ सड़क का मसला नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वच्छता, ट्रैफिक और शहर की कानून व्यवस्था का खुला मजाक है। कूड़े के ढेरों से बदबू फैलती है, धुआं उठता है, राहगीरी मुश्किल हो जाती है और कब्जाधारी हर दिन थोड़ा और आगे बढ़ जाते हैं। लोगों का गुस्सा फटने को तैयार है। एक निवासी ने कड़वा तंज कसा अगर एक सड़क नहीं बचा पा रहे, तो पूरा शहर वैâसी सुरक्षा में है?’ दूसरे ने कहा ‘आज वाकोला गया कल हमारी गली जाएगी। फिर किसकी सुनवाई होगी?’
वाकोला पाइपलाइन रोड की यह स्थिति सिर्फ एक इलाका नहीं, मुंबई की उस सच्चाई का खुला आईना है जहां अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है और प्रशासनिक जवाबदेही सिकुड़ती जा रही है। नागरिकों का अब बस एक ही सवाल है-क्या इस सड़क को आजादी मिलेगी या यह हमेशा के लिए खो जाएगी?

अन्य समाचार