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रिपोर्टर डायरी : पुतिन दौरा, राहुल से डर…

एम. एम. एस.

नरेंद्र मोदी पूर्व में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर खड़गे और गुलाम नबी आजाद को विदेशी नेताओं से मिलवाते रहे हैं पर राहुल गांधी के नाम पर यह राजनीतिक परंपरा तोड़ दी जाती है, तो आखिर क्यों? भाजपाइयों के सेट किए हुए नरेटिव के हिसाब से राहुल गांधी ‘पप्पू’ हैं मूर्ख हैं। अगर राहुल गांधी मूर्ख हैं, तब तो राहुल को विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से अवश्य ही मिलवाना चाहिए था। वे ऊलजुलूल बातें करतें, उनका रहा बचा राजनीतिक वैâरियर भी खत्म हो जाता। पर माफ करिए, यह असली वजह नहीं है। वास्तव में वे राहुल गांधी से डरते हैं, इसके दो कारण हैं।
अगर राहुल गांधी किसी विदेशी नेता से मिलता है तो सबसे पहला डरने का कारण यह है कि जनता यह देख लेगी कि किसी विदेशी नेता से वैâसे मिला जाता है, वैâसे बात की जाती है।
दूसरा कारण – राहुल गांधी एकलौते शख्स हैं, जो मोदी से डरते नहीं है। खड़गे या कोई भी अन्य नेता मोदी के दबाब में आ सकते हैं पर यह पुतिन से मिलते, तो सिंदूर, चीन, ट्रंप, तकनीक ट्रांसफर, आर्कटिक में भागीदारी, नार्दन सी रुट, यूक्रेन, ब्रिक्स इत्यादि पर ब्लंट होकर सवाल पूछ लेते। कवरेज करना मीडिया की मजबूरी हो जाती और विश्वगुरु की पोल खुल जाती।
इसलिए राहुल गांधी विदेशी नेताओं से न मिले, यही मोदी के हित में है।
बहरहाल, पुतिन की भारत यात्रा खत्म हो चुकी है। इस यात्रा का एकमात्र हासिल यह है कि -पुतिन ने मोदी की तारीफ की। एक मजबूत सोर्स ने बताया कि वापस जाते हुए अपना मल मूत्र भी ब्रीफकेस में बंद कर के ले गए
‘पूप सूटकेस’
दरअसल पुतिन जब भी किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं, उनके साथ एक खास ‘पूप सूटकेस’ जाता है। इस सूटकेस में उनका मल और मूत्र एकत्र किया जाता है, जिसे बाद में मॉस्को वापस लाया जाता है। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य विदेशी खुफिया एजेंसियों को पुतिन के मल के नमूने हासिल करने से रोकना है, जिससे उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी का खुलासा हो सकता है। हमारे एक मित्र ने यह पोस्ट शेयर किया। जैसा पढ़ा कॉपी पेस्ट कर चिपका दिया।

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