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मुस्लिम वर्ल्ड : हूतियों के यमन में छिड़ गई भारी जंग!.. इस बार कौन लगा रहा नजर?

सूफी खान

यमन के हूतियों के दो दुश्मन मुल्क आमने-सामने आ गए हैं। साल २०१४ के पहले सऊदी ने अपने पड़ोसी मुल्क यमन पर वहां के तेल और दीगर रिसोर्सेज के लिए वहां की सरकार में खूब दखलंदाजी की। जिसका अंजाम हुआ कि हूती शिया जैदी, जिन्हें अंसारुल्लाह भी कहा जाता है, ने सऊदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। हूतियों ने राजधानी सना समेत यमन के एक बड़े नॉर्थ-वेस्ट हिस्से पर कंट्रोल हासिल कर लिया और सरकार बना ली। उस वक्त की सऊदी समर्थक यमन की अब्दुर्रब मंसूर हादी सरकार यमन के एक दूसरे हिस्से में सिमट गई। हूतियों के डर से यमन के प्रेसिडेंट अब्दुर्रब मंसूर हादी यमन छोड़कर सऊदी भाग गए थे। अंसारुल्लाह ने सऊदी की एयर स्ट्राइक के जवाब में उस वक्त सऊदी की सबसे बड़ी और वहां के शाही खानदान के कंट्रोल वाली तेल रिफाइनरी पर मिसाइलें दाग दी थीं। हालात ऐसे बने कि सऊदी को ईरान से दरख्वास्त लगानी पड़ी, तब कहीं जाकर हूती रुके और उसके बाद सऊदी ने डायरेक्ट हूतियों पर कभी हाथ नहीं डाला। अब यूएई भी वही गलती करने जा रहा है यमन पर हाथ डालकर।
अब खबर आ रही है कि यमन को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के बीच तनाव बढ़ रहा है। यमन के तेल से भरपूर हद्रामौत इलाके में यूएई के समर्थन वाली मिलिशिया अहम इलाकों पर कब्जा कर रही है। हालात ये है कि अब वहां हिंसक झड़पें शुरू हो गई हैं। यूएई समर्थित मिलिशिया एसटीसी और एनआरएफ अल-घुराफ इलाके की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही हैं। यूएई समर्थित मिलिशिया एसटीसी और एनआरएफ ने सेयुन में प्रेसिडेंशियल पैलेस पर धावा बोल दिया है।
इसके पहले ३ दिसंबर को यूएई समर्थित सेना ने दूसरे सबसे बड़े शहर सेयुन पर कब्जे की घोषणा की थी। इसके बाद से यमन के सबसे बड़े प्रांत हद्रामौत में यूएई और सऊदी समर्थित सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया है। एक-दूसरे पर तोप से भी हमले किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि यूएई अपनी तेल खनिज और गोल्ड की भूख के चलते अब उन देशों पर नजर गड़ाए हुए है, जहां पहले से किसी तरह की खींचतान चल रही है। ऐसे में वो एक गुट को सपोर्ट करता है। हथियार, ट्रेनिंग, पैसा और दीगर चीजें देकर खूब कत्लोगारत करवाने का आरोप भी उस पर लगता रहा है। इसी तरह सूडान में भी यूएई का समर्थन वहां की सेना के खिलाफ लड़ रहे आरएसएफ के लड़ाकों को है, जिसके चलते सूडान में भारी हिंसा हुई और अब भी रुक-रुक कर जारी है।
यमन में उत्तर-पश्चिम हिस्से पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है, जबकि दूसरे इलाकों पर सऊदी समर्थित सरकार का नियंत्रण है। यमन के जिस हद्रामौत पर यूएई का दखल बढ़ा है, वो यमन का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के एक तिहाई से ज्यादा हिस्से में पैâला है। तेल और खनिज से मालामाल होने के साथ ही इसके साथ ४५० किलोमीटर लंबी तटरेखा भी है। हद्रामौत यमन का एक ऐतिहासिक और भौगोलिक क्षेत्र है, जो अपनी समृद्ध संस्कृति, प्राचीन शहरों (जैसे शबवा, सेयून, तरिम) और अपनी खास पहचान के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र यमन के पूर्वी हिस्से में है और हद्रामी लोगों का घर है, जो अरब प्रायद्वीप के मूल निवासी हैं और हद्रामी अरबी भाषा बोलते हैं और यह क्षेत्र हाल के वर्षों हूती और यमन की निर्वासित सरकार के संघर्ष के बावजूद यमन के शांत हिस्सों में से एक माना जाता है। बताया जा रहा है कि यूएई इसके पहले यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन में पार्टनर रहा है। इसके बावजूद रियाद और अबू धाबी यमन के संसाधनों और रणनीतिक पोर्ट पर कंट्रोल के लिए मुकाबला कर रहे हैं। हद्रामौत इस दुश्मनी का केंद्र बन गया है, यानी हूती से लड़ता हुआ सऊदी अपने दोस्त यूएई से भिड़ रहा है और दोनों इस फिराक में हैं कि किसी तरह यमन के तेल गैस और बाकी रिसोर्सेस पर कंट्रोल हासिल हो सके। इनकी इस खींचतान के बीच हूती अभी खामोश हैं, लेकिन अगर अंसारुल्लाह ने यहां एक्शन लिया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

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