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ठाणे स्टेशन विस्तार में भ्रष्टाचार…१२० करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बना… २४५ करोड़ रुपए का ‘भस्मासुर’!

-छह महीने में लागत १२५ करोड़ रुपए बढ़ी

-मुंबई डिविजन रेलवे का काम शून्य

सामना संवाददाता / मुंबई

ठाणे रेलवे स्टेशन का विस्तार भ्रष्टाचार और रेल प्रशासन की घोर लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। १२० करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट सुस्ती, फाइलों में अटकी मंजूरियों और काम न करने की जिद के कारण २४५ करोड़ का ‘भस्मासुर’ बन गया। छह महीनों में लागत का १२५ करोड़ बढ़ जाना बताता है कि यह योजना विकास नहीं, सरकारी कुप्रबंधन का क्लासिक उदाहरण बन चुकी है। मुंबई डिविजन रेलवे की हालत यह है कि न एक इंच पटरी बिछी, न एक खंभा खड़ा हुआ और न ही साइट पर एक कर्मचारी दिख रहा है।
बता दें कि ठाणे स्टेशन के भार को कम करने के लिए ठाणे और मुलुंड के बीच विस्तारित स्टेशन बनाने का प्रस्ताव सामने आया था। मनोरोग अस्पताल की जमीन पर यह प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है और स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने अपने ६० प्रतिशत हिस्से का काम पूरा कर लिया, मगर रेल मंत्रालय और रेल प्रशासन के बीच तालमेल के अभाव में स्टेशन के लिए एक इंच भी पटरी नहीं बिछाई जा सकी है। बता दें कि ३ जुलाई २०२४ को हुई बैठक में इस स्टेशन के रेलवे हिस्से की लागत और काम रेल मंत्रालय द्वारा किए जाने का पैâसला लिया गया था, लेकिन मुंबई डिविजन के अधिकारियों को अब तक मंत्रालय की तरफ से कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। ऐसे में मुंबई डिविजन के अफसर बहाना बता रहे हैं कि सूचना के अभाव में वे काम शुरू नहीं कर सकते।
कागजों पर वादों की बरसात
इस मामले में सिर्फ कागजों पर बैठकों और वादों की बरसात होती रही, लेकिन जमीन पर जीरो प्रगति ने पूरे प्रोजेक्ट को मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
लापरवाही की राष्ट्रीय केस-स्टडी
ठाणे जैसे हाई-प्रेशर स्टेशन के लिए जरूरी यह विस्तार सरकारी सुस्ती, रेलवे की ठंडेपन भरी कार्यशैली और मंत्रालय की चुप्पी के बीच बेमौत लटक गया है। जनता को राहत देने वाला प्रोजेक्ट अब लापरवाही की राष्ट्रीय केस-स्टडी बन चुका है और इसका सबसे बड़ा दोषी वही सिस्टम है जिसने समय, पैसा और भरोसा तीनों को बेरहमी से कुचल दिया।

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