मुख्यपृष्ठधर्म विशेषउत्तरप्रदेश में हैं तीन दिव्य शक्तिपीठ

उत्तरप्रदेश में हैं तीन दिव्य शक्तिपीठ

एक बार मुनियों का एक समूह यज्ञ करवा रहा था। यज्ञ में सभी देवताओं को बुलाया गया था। जब राजा दक्ष आए तो सभी लोग खड़े हो गए लेकिन भगवान शिव खड़े नहीं हुए। भगवान शिव दक्ष के दामाद थे। यह देख कर राजा दक्ष बेहद क्रोधित हुए। दक्ष अपने दामाद शिव को हमेशा निरादर भाव से देखते थे। इस बीच सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर भी और शंकरजी के रोकने पर भी जिद्द कर राजा दक्ष के यज्ञ में शामिल होने चली गई। यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का कारण पूछा और पिता से उग्र विरोध प्रकट किया। इस पर दक्ष ने भगवान शंकर के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें करने लगे। इस अपमान से पीड़ित हुई सती को यह सब बर्दाश्त नहीं हुआ और वहीं यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी। सती के उसी पार्थिव शरीर से शक्तिपीठों का निर्माण हुआ।
अनंत ब्रह्माण्डों का भरण-पोषण करने वाली मां अन्नपूर्णा की कृपास्थली उत्तर प्रदेश की धरती देवीमय है। यहां देवी के अनेक मंदिर हैं। उत्तरप्रदेश में ३ दिव्यशक्तिपीठ हैं।
१. वृंदावन शक्तिपीठ- यह स्थान महर्षि शाण्डिल्य की साधना स्थली भी है। यहां देवी देह के केश यानी बालों का पतन हुआ था। शक्ति उमा और भैरव भूतेश है।
कहां है मंदिर- मथुरा और वृंदावन के बीच भूतेश्वर नाम का रेल्वे स्टेशन है। उस स्टेशन से भूतेश्वर मंदिर पास ही माता का मंदिर स्थित है। इन माता को चामुण्डा भी कहा जाता है।
२. वाराणसी शक्तिपीठ- मान्यता है कि यहां भगवान विश्वनाथ विश्राम करते हैं। यहां देवी देह की दाहिनी कर्ण मणि गिरी थी। शक्ति विशालाक्षी और भैरव काल भैरव है।
कहां है मंदिर- वाराणसी में यह मंदिर मीरघाट के धर्मेश्वर के समीप विशालाक्षी गौरी के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
३. प्रयाग शक्तिपीठ- यहां देवी सती के हाथों की उंगलियां गिरीं थी। शक्ति ललिता और भैरव भव है।
कहां है मंदिर- प्रयाग में अक्षयवट के निकट ललितादेवी का मंदिर है, कुछ विद्वान इसे ही शक्तिपीठ मानते हैं। कुछ विद्वान आलोपी माता के मंदिर को शक्तिपीठ मानते हैं। वहां भी ललिता देवी का मंदिर है। साथ ही, एक अन्य मान्यता के अनुसार मीरपुर में ललितादेवी का शक्तिपीठ है।

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