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करंजा बंदरगाह पर गाद का कहर…३०० मछुआरों की नौकाएं फंसीं!

-२५ हजार परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट

-सरकार से तत्काल मदद की मांग

जेदवी / उरण

उरण तालुका के करंजा बंदरगाह पर गाद का संकट इस कदर गहरा गया है कि करीब ३०० मछुआरों की नावें कीचड़ में धंसी पड़ी हैं, जिससे समुद्र में मछली पकड़ने का काम पूरी तरह ठप हो गया है। इस हालात ने २५ हजार से ज्यादा मछुआरा परिवारों की आजीविका को खतरे में डाल दिया है, जबकि उनकी नावें किनारे से न आगे बढ़ पा रही हैं और न समुद्र में उतर पा रही हैं।
समुद्र में तेज ज्वार के दौरान गाद जमने की समस्या और बढ़ जाती है। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए मछुआरा संगठनों ने सरकार के सामने कम से कम १०० करोड़ रुपए के तत्काल राहत कोष की मांग रखी है, ताकि डूबती आजीविका को बचाया जा सके।
बंदरगाह के विकास और गाद निकालने के लिए १८३ करोड़ रुपए का प्रस्ताव पिछले सात वर्षों से राज्य सरकार के पास लंबित है, लेकिन अभी तक प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिली है। इसी कारण गाद की समस्या हर साल गंभीर रूप लेती जा रही है। नावें निकालने के लिए मछुआरों को दिन-रात संघर्ष करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुंबई बंदरगाह विभाग ने करंजा बंदरगाह का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर गाद की गहराई और मात्रा का आकलन किया। विभाग अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगा। करंजा मच्छीमार सहकारी संस्था ने भी सरकार से मांग की है कि नावों को सुचारू रूप से चालू करने के लिए १०० करोड़ रुपए का फंड तुरंत मंजूर किया जाए।
अब तक नहीं किया कोई उपाय
हालांकि, बंदरगाह विभाग के अधिकारी राजेश अग्रवाल ने निरीक्षण तो किया, लेकिन अभी तक कोई ठोस उपाय योजना अमल में नहीं लाई गई है। मछुआरों का कहना है कि बंदरगाह के चैनल की गहराई बढ़ाने के साथ-साथ ‘ब्रेक वॉटर’ के पास जमाए गए पत्थरों को हटाकर नई जगह धक्का बनाया जाए, जिससे १०० और नावों को जगह मिल सके।
धोखाधड़ी के मामले: नवंबर २०२५ में, करंजा बंदरगाह के मछुआरों ने निर्यात फर्मों द्वारा १ करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की शिकायतें भी दर्ज करार्इं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और खराब हो गई।
अन्य पहल: बंदरगाह की ऊंचाई आवश्यक स्तर से दो फीट कम है, जिससे उच्च ज्वार के दौरान नावें टकराती हैं। इन बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने के लिए भी अनुरोध किए गए हैं।

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