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अब शराब की दुकान भी सोसायटी की मर्जी से!” – उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का नया ‘घरों-घरों का अनुमोदन नियम’

 सामना संवाददाता /  नागपुर
विधानसभा में आज एक दिलचस्प घोषणा हुई—अब शराब की दुकानों को इधर-उधर शिफ्ट करने के लिए सोसायटी की एनओसी अनिवार्य होगी। यानी अब शराब की दुकान कहां होगी, यह सरकार से ज़्यादा सोसायटी के व्हॉट्सऐप ग्रुप पर तय होगा!

उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री अजीत पवार ने यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने एफएल-2 और सीएल-3 लाइसेंस वाली विदेशी व देशी शराब की दुकानों के स्थानांतरण को सोसायटी की सहमति पर निर्भर कर दिया है।

सदस्य शंकर जगताप के प्रश्न का उत्तर देते हुए पवार ने स्पष्ट किया कि “अगर दुकान किसी सोसायटी क्षेत्र में है, तो बिना सोसायटी की सहमति के वह हिल भी नहीं सकती… चाहे मालिक कितना भी हाई-स्पिरिट में क्यों न हो!”

साथ ही, पिंपरी-चिंचवड़ के कोलीवाड़ा और राहतानी की अवैध शराब दुकानों पर भी सरकार ने ‘हैवी-हैंडेड’ कार्रवाई करते हुए एक को अदालत के आदेशों तक पहुंचा दिया है और दूसरी पर 50,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया है।

इस नए नियम के बाद अब यह उम्मीद है कि— सोसायटी के चुनावों में “हम शराब की दुकान हटवाएंगे” जैसा नया मुद्दा भी शामिल हो सकता है और सोसायटी मीटिंग में अब पार्किंग के बाद सबसे बड़ा विवाद शराब की दुकान पर ही होगा!

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