सामना संवाददाता / मीरा रोड
रिडेवलपमेंट विवादों में आमतौर पर सोसायटी सदस्य बिल्डरों पर अनियमितताओं के आरोप लगाते हैं, लेकिन ग्रीन पार्क महल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी से जुड़े एक मामले ने इस रूढ़ि को पलट दिया है। मदार बिल्डर्स एंड डेवलपर्स एलएलपी ने काशीमीरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए सोसायटी के पदाधिकारियों और ओरियन कंस्ट्रक्शन के मालिक पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।
बिल्डर का कहना है कि सोसायटी के चेयरमैन मोहम्मद मोहसिन उमर शेख, सेक्रेटरी अब्दुल रहमान मोहम्मद शेख, कोषाध्यक्ष मोहम्मद जुबेर सलमानी तथा ओरियन कंस्ट्रक्शन के जुबेर सिद्दीकी और उनके सहयोगी साकिब खान ने मिलकर उनके साथ जालसाजी और षड्यंत्र रचा।
बिल्डर के मुताबिक, वर्ष २०२१ में सोसायटी स्वयं उनके पास पुनर्विकास प्रस्ताव लेकर आई थी और २४ जून २०२१ को रजिस्टर्ड डेवलपमेंट एग्रीमेंट व इरिवोकेबल पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर किए गए थे। बिल्डर का दावा है कि चार साल में उन्होंने टाइटल क्लियरेंस, जमीन रिकॉर्ड दुरुस्ती, एनओसी, प्रस्ताव मंजूरी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं पर लगभग ९२.६९ लाख रुपए खर्च किए।
शिकायत में कहा गया है कि सोसायटी टाइटल प्रक्रिया को लेकर लगातार बहाने बनाती रही और बाद में पता चला कि डीम्ड कंवेयंस में कई खामियां थीं, जिनके समाधान पर भी बिल्डर ने ही खर्च किया। इन सबके बावजूद २१ अप्रैल २०२५ को सोसायटी ने अचानक डेवलपमेंट एग्रीमेंट समाप्त करने की नोटिस भेज दी। बिल्डर का आरोप है कि यह निर्णय ओरियन कंस्ट्रक्शन द्वारा अधिक लाभ के लालच में आकर लिया गया।
बिल्डर ने यह भी आरोप लगाया कि सोसायटी पदाधिकारियों और ओरियन कंस्ट्रक्शन से जुड़े लोगों ने परिसर में लगाए गए उनके डेवलपर बोर्ड को नुकसान पहुंचाया, जिससे करीब १ लाख रुपए का नुकसान हुआ और सदस्यों को भ्रमित कर अवैध बैठक बुलाने की कोशिश की।
शिकायत में बीएनएस की धारा ६१(२), ३१६(५), ३१८(२), ३२४(३) और ३(५) के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा पहले दिए गए आदेश ७९ए को कथित रूप से राजनीतिक दबाव में बदले जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिडेवलपमेंट से जुड़े इस अनोखे मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि यहां शिकायतकर्ता स्वयं बिल्डर है और आरोपों का सामना सोसायटी के पदाधिकारी कर रहे हैं। अब पुलिस की कार्रवाई पर सभी की निगाहें हैं।
