एड. राजीव मिश्र
मुंबई
भुलई अउर जोखन दूनउ जने मा घनघोर मित्रता रही। दिनभर मा एक बेरी आपस मा मेल-मुलाकात जरूर होत है। एक-एक बइठकी मा पूरा के पूरा दिन निकरि जाय पर यहि दूनउ जने के बात कबहुँ न ओराय। आज सुबह-सुबह जोखन भुलई के इहाँ पहुँचे अउर बोले, का हो भुलई! का खबरि है? का खबर बताई जोखन! जमाना बड़ा खराब आइ गवा है। अरे, भवा का? का होई जोखन, बस जमाना के दुहाई हो। अरे यार, बकलोलय हो का पूरा? सीधा-सीधा काहे नहीं बोलत हौ कि आखिर में भवा का? झुलइया के सढ़ुआइन आई है पता है कि नही? हाँ, तो का होइ गवा अगर सढ़ुआइन आई है तो?
ओहिके पहिनावा देखेउ कि नाही। साड़ी वैâइसे पहिनत है और ओहिके बिलाउज देखो, अइसन लागति है कउनउ लाजय सरम नही बची है। ई शहर तो हौ नाही? छोड़व भुलई, तुमहूँ कहाँ तिरिया परपंच में परे हौ, अब चली-चला के बेला है, भगवान के नाव लेव बस। तुम लेव भगवान के नाव, इहाँ चमेलिया के देखिके करेजा फाटत है अउर तू गियान देत अहा। अच्छा, तो ई बात है। तबय हम कही कि अचानक तुम्हरे मन के मनमाड काहें होइ गवा है। अइसन करो, बगइचा में चमेली के बुलाओ अउर भक्क से ‘आई लभ यू’ बोलि देव। अइसा करो जोखन हमार एक प्रेम-पत्र चमेलिया के लगे पहुँचाय देव, बस बाकी के काम हम खुदय कइ लेब। काफी मान-मनउअल के बाद जोखन तैयार भये। दुइ दिन खूब सोचि-बिचारि के भुलई आखिर चमेलिया के लभ लेटर लिखि के पूरा किहिन और जोखन के पकड़ाय दिहिन। चमेलिया लेटर के पहिलय लाइन ‘हमार परान पियारी चमेली’ पढ़ि के मुस्कियाय के कहिस, अइसन है जीजा! शाम के जब मुन्हीयार होइ जाय, उनका छोटके बाग मा भेजो। शाम के भुलई, मूड़े में चमेली के तेल डारिके, अत्तर लगाइके बगइचा में पहुँचे, अउर पहुँचते चमेलिया के अकवारी में लेवय बदे बढ़े, पीछे से जवन लाठी, जवन लाठी परी कि आज सात दिन होइ गवा पर अस्पताल से छुट्टी नही मिली।
