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रिपोर्टर डायरी : कांस्टेबल पर हमला…

फिरोज खान

मुंबई में सुरक्षा को लेकर चिताएं बढ़ गई हैं, खासकर महिलाओं की। अंधेरी पुलिस स्टेशन में जो घटना हुई उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। जनता अपनी सुरक्षा को लेकर जिस पर भरोसा करती है आज वही पुलिस खुद असुरक्षित नजर आ रही है। महिला कांस्टेबल ड्यूटी निभा रही थी तभी अंधेरी पुलिस स्टेशन में एक शख्स गुस्से के आलम में घुसा और गर्भवती महिला कांस्टेबल पर हमला कर दिया।
पति निकला हमलावर
थोड़ी देर के लिए पुलिस स्टेशन में हंगामा मच गया। वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने शख्स को पकड़ लिया। पूछताछ में पता चला कि हमला करने वाला शख्स महिला कांस्टेबल का पति है और घरेलू झगडों के कारण वह अंधेरी पुलिस स्टेशन आ धमाका। सवाल यह है कि हमलावर पति की हिमाकत वैâसे हुई पुलिस स्टेशन में घुसकर हमला करने की। क्या लोगों के दिल से खाकी वर्दी का डर खत्म हो रहा है? या पुलिस को कमतर समझने लगे हैं। ३७ साल की महिला कांस्टेबल के पति के खिलाफ अंधेरी पुलिस स्टेशन के अंदर हमला करने का केस दर्ज किया गया है। आरोपी पति की मां और उसकी तीन बहनों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई है, इन पर आरोप है कि उन्होंने कांस्टेबल वनिता हजारे को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
ससुरालवालों पर आरोप
महिला कांस्टेबल ने २०२१ में ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने वाले ३७ साल के शख्स से शादी की थी। उस समय उनकी रोटेशनल शिफ्ट होती थी और उनके ससुराल वाले अक्सर उन्हें खाना बनाने और अपने माता-पिता से सोना न लाने जैसी बातों पर ताना मारते थे। हजारे ने आगे दावा किया कि उनके ससुराल वालों ने उनके पति को उकसाया, जो शराबी है। लगातार परेशान किए जाने से तंग आकर वह अपनी चार साल की बेटी के साथ अंधेरी की एक पुलिस कॉलोनी में रहने लगीं और कुछ दिनों बाद पति भी उनके साथ रहने लगा। चार से पांच महीने बाद, वह अपनी पुरानी आदतों पर लौट आया और पत्नी की सैलरी मांगते हुए नशे में उसके साथ बुरा बर्ताव करने लगा। असल में पति ने पनवेल में एक ट्रक और एक फ्लैट खरीदा था और पत्नी पर बैंक की ईएमआई भरने का दबाव बनाता था। मना करने पर मारपीट और धमकियां देता था। अंधेरी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उमेश मचिंदर ने बताया महिला कांस्टेबल के पति और बहनों के खिलाफ ४९८ के तहत मामला दर्ज किया है।
महिला कांस्टेबल के साथ हुई अमानवीय घटना से यही मालूम होता है कि फिर आम महिलाओं को कितना प्रताड़ित किया जाता होगा। महिला सुरक्षा के लिए कानून तो बने हैं, लेकिन उस पर पूरी तरह अमल होता नहीं दिखाई देता है।

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