उमेश गुप्ता / वाराणसी
मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी यानी संकष्टी चतुर्थी (जिसे सकट चौथ, तिलकुट चौथ और वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहा जाता है) पर मंगलवार को लोहटिया स्थित प्रसिद्ध बड़ा गणेश मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की सर्दी और कोहरे के बावजूद आस्था ने ठंड पर भारी पड़ते हुए भक्तों को घरों से बाहर खींच लिया। नववर्ष की पहली गणेश चतुर्थी होने के कारण शहर के अन्य गणेश मंदिरों में भी दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।
संतान प्राप्ति और उनकी दीर्घायु की कामना लेकर व्रत रखने वाली महिलाएं परिवार सहित सुबह-सुबह मंदिर पहुंचीं। बड़ा गणेश मंदिर के बाहर तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही, जबकि मंदिर की ओर जाने वाली गलियां और डीएवी कॉलेज रोड भक्तों से पूरी तरह भर गए। मंदिर में भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की गई और भक्तों ने विधि-विधान से आरती उतारी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा से सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत रखकर चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। बड़ा गणेश मंदिर की स्वयंभू त्रिनेत्र गणेश प्रतिमा के दर्शन मात्र से भक्तों की बाधाएं दूर होने की मान्यता है, जिस कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
संकष्टी चतुर्थी पर सोनारपुरा स्थित चिंतामणि गणेश मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्ग विनायक गणेश मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही । केदारखंड क्षेत्र में पड़ने वाले इन दोनों ही मंदिरों में संकष्टी चतुर्थी पर भक्तों की भारी भीड़ सुबह से लेकर पूरे दिन जारी रही। इस दौरान दोनों ही मंदिर में भव्य सजावट किया गया था।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी।
मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मी लगातार चक्रमण कर रहे हैं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि जेबकतरे, चैन स्नेचिंग या अन्य घटनाओं को रोका जा सके। पुलिस द्वारा लाउडहेलर के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार सतर्क किया जा रहा है और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
पुलिसकर्मियों ने दर्शन–पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों, से अपील की है कि वे अपने कीमती जेवरात, मोबाइल फोन, घड़ी और अन्य मूल्यवान सामान की स्वयं सुरक्षा करें। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि दर्शन के दौरान महंगे आभूषण पहनकर न आएं, ताकि किसी भी प्रकार की चोरी या छीना-झपटी की घटना से बचा जा सके।
