-प्राचार्य हत्याकांड के आरोपी अनिल मिश्र की खुदकुशी की वजह जांचने में जुटी सुल्तानपुर पुलिस
विक्रम सिंह / सुल्तानपुर
करीब डेढ़ दशक पूर्व दिसंबर २०११ की एक सर्द सुबह सुल्तानपुर शहर के गनपतसहाय पीजी कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य व उनके गनर की दिनदहाड़े कॉलेज गेट पर हत्या की सनसनीखेज वारदात एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस वारदात के मुख्य आरोपियों में से एक अनिल मिश्र सोमवार की शाम लंबा सुसाइड नोट छोड़कर घर में ही फंदे से झूल गया। प्राचार्य हत्याकांड में करीब साढ़े चार वर्ष पूर्व ही उसे उम्रकैद की सजा हो गई थी। कुछ माह जेल काटने के बाद ही हालांकि उसे हाई कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया, लेकिन कोर्ट-पुलिस और स्कूल-कॉलेज प्रबंधन आदि की मुक़दमेबाजी के चक्कर ने उसे बुरी तरह परेशान कर दिया था।
सोमवार को अनिल का फंदे से झूलता हुआ शव पुलिस ने बरामद किया तो उसी कमरे में उसका ढाई पेज लंबा सुसाइड नोट भी मिला। पुलिस फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलन के दौरान उस पत्र को भी सील कर दिया है। सुल्तानपुर के एएसपी एपी सिंह कहते हैं कि सुसाइड नोट से प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है कि स्कूल-कॉलेज प्रबंधन व कोर्ट में चल रहे मुकदमों आदि से परेशान होकर ही दिवंगत आरोपी ने ऐसा कदम उठाया होगा। फिलहाल, यह जांच का विषय है। विवेचना के दौरान यह सुसाइड नोट महत्वपूर्ण साक्ष्य है। अलबत्ता हमें परिवारजनों की ओर वारदात के बाबत तहरीर का भी इंतजार है।
..प्राचार्य डॉ.प्रताप बहादुर सिंह हत्याकांड में नाम आने के बाद आया था सुर्खियों में !
यूं तो अनिल मिश्र गनपतसहाय पीजी कॉलेज में संविदा क्लर्क था और संविदा की इस नौकरी से हटा दिए जाने के कारण तत्कालीन प्रिंसिपल सिंह से खफा रहता था (मूलतः जौनपुर जिले के निवासी रहे प्रिंसिपल साहब ने कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं की तमाम फाइलें एकसाथ खोल दी थीं)। बावजूद वो रामलीला मैदान में संचालित एडेड संत तुलसीदास पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भी सर्वेसर्वा यानी प्रबंधक था। संप्रति दिवंगत मिश्र की पत्नी इस स्कूल की प्रबंधक हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार, शूटरों व अपने साथियों के सहयोग से मिश्र ने प्राचार्य की हत्या कर दी थी। मामले में स्थानीय अदालत से उसे दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा भी मिल चुकी थी। लेकिन जमानत मिलने के बाद भी वो अपने आपराधिक केस व स्कूल-कॉलेज के मामलों को लेकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर में उलझा ही रहा। एकाकीपन ने भी उसे घेर लिया था। तमाम बातों का उसने जिक्र भी कमरे में छोड़े गए अपने आखिरी पत्र में किया है। देखना है कि पुलिस की विवेचना के बाद पूरे प्रदेश को दहला देने वाले एक चर्चित हत्याकांड के इस आरोपी की खुदकुशी के रहस्यों पर से पर्दा कबतक उठेगा!
