संजय राऊत
महाराष्ट्र में इन दिनों गैरराजनीतिक मुद्दों की धूम मची हुई है। जिन्हें सत्ता का उपयोग समाज परिवर्तन के लिए करना चाहिए था, उन्होंनें समाज को बिगाड़ने का काम जोरों में शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र में अगले तीन साल तक कोई चुनाव नहीं है, लेकिन तीन साल बाद होने वाले चुनावों की राजनीति अभी से शुरू हो गई है। इसी पार्श्वभूमि पर एक सुखद खबर सामने आई है। एक बड़े उद्योगपति अनिल अग्रवाल अडानी ग्रुप के खिलाफ अदालत पहुंच गए हैं। अडानी को चुनौती देना मतलब सीधे प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को चुनौती देने जैसा है। अनिल अग्रवाल के प्रख्यात वेदांता ग्रुप के साथ क्या हुआ, इसे समझना चाहिए। इंप्रâास्ट्रक्चर क्षेत्र का जेपी (Jaypee) ग्रुप दिवालिया हो गया। बैंकों से उन्होंने भारी कर्ज लिया था। सरकार ने ५.५ लाख करोड़ के ‘जेपी’ ग्रुप की संपत्ति के लिए बोली मंगाई।
वेदांता ग्रुप की बोली – १७,००० करोड़, अडानी ग्रुप की बोली १४,५०० करोड़। इस ‘बोली’ में वेदांता ग्रुप साफ तौर पर अग्रणी रहा। फिर भी यह प्रोजेक्ट NCLT के माध्यम से अडानी को सौंप दिया गया। वेदांता अब इसके खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। यहां एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि NCLT में मतदान के अधिकार किसके पास हैं? सार्वजनिक क्षेत्र के १२ बैंकों के पास ये अधिकार हैं। इन बैंकों पर सरकार का नियंत्रण है। ऐसी संस्थाओं को झुकाकर फैसला बदला जाता है। देश की प्रत्येक सार्वजनिक और बैंकों के कब्जे वाली संपत्ति सिर्फ अडानी की जेब में डाली जा रही है। इसे free market अर्थात मुक्त बाजार नहीं कहा जा सकता। यह तो अत्यंत नियोजित तरीके से सरकारी संपत्ति का हस्तांतरण है। देश की अर्थव्यवस्था का मालिकाना हक कुछ लोगों के हाथ में जाना सिर्फ पूंजीवाद नहीं, बल्कि मित्रपूंजीवाद (Cronyism) है। इससे देश और लोकतंत्र कमजोर होता है। ‘वेदांता समूह अब इस भ्रष्ट व्यवहार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है; क्योंकि ‘जेपी’ व्यवहार में अडानी को फायदा हो इसलिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ। इसमें सरकारी खजाने को ३,००० करोड़ का चूना लगाया गया। वेदांता ग्रुप की न्यायालयीन लड़ाई इसी मुद्दे पर होगी। इसमें खुशी की बात यह है कि कल तक अनिल अग्रवाल प्रधानमंत्री मोदी और उनकी नीतियों की ‘भगतगीरी’ करते थे, मोदी की वजह से यूरोप, अमेरिका में भारतीय उद्योगपतियों की प्रतिष्ठा वैâसे बढ़ी, यह बताते थे, लेकिन असल में एक अडानी की खातिर मोदी सरकार ने अनिल अग्रवाल के साथ ही धोखा कर दिया। अब इस मामले का न्यायालय में क्या होगा? लोग कहते हैं, अडानी ग्रुप के पक्ष में ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा। हमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत पर पूरा भरोसा है!
सब कुछ एक आदमी के लिए
महाराष्ट्र सहित पूरे देश में फिलहाल क्रोनी कैपिटलिजम (crony capitalism) का ही जोर बढ़ा हुआ है। व्यापार के क्षेत्र में भारत अमेरिका का गुलाम बन गया है। खाड़ी युद्ध के बाद अमेरिका ने भारत पर तेल खरीदने के प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका की अनुमति के बिना मोदी का नया भारत रूस जैसे दोस्त से भी तेल खरीद नहीं सकता। ये वैश्विक बाजार का क्रोनी कैपिटलिजम है। ये भी मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था नहीं है। सत्ता में बैठे मुख्य नेता, कुछ चुनिंदा उद्योगपति, व्यावसायिक, साहूकार, इनके बीच घनिष्ठ संबंधों की वजह से सारी सरकारी संपत्ति, टैक्स में छूट, कर्जमाफी, कर्ज व्यवस्था के मामले में खुला पक्षपात होता है। निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी जाती है और सिर्फ अडानी, दो-चार अन्य उद्योगपतियों का ही फायदा किया जाता है। देश की तिजोरी को इसमें नुकसान होता है। ‘जेपी’ सौदे में ही तीन हजार करोड़ का नुकसान हुआ, ये साफ दिख रहा है। गौतम अडानी के अकृत्रिम उद्योग विस्तार के बारे में एक जोरदार प्रेजेंटेशन श्री. राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क की सभा में किया। तब कई लोगों की आंखें खुली की खुली रह गर्इं, लेकिन अडानी की घुड़दौड़ नहीं रुकी। अडानी ग्रुप को देश के बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली परियोजनाएं, एसईजेड परियोजनाएं, हजारों करोड़ के सरकारी ठेके, सस्ती जमीनें और इन्हें खरीदने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बड़े कर्ज दिए। यानी सरकारी पैसे से ही श्री. अडानी सरकारी संपत्ति खरीद रहे हैं और मालामाल बन रहे हैं। मुंबई, अमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी जैसे छह एयरपोर्ट अडानी ग्रुप को एक ही बोली पर मिल गए। ये सभी एयरपोर्ट आज अंतरराष्ट्रीय स्तर के बिना ही चलाए जा रहे हैं। ‘धारावी’ पुनर्वसन जैसी परियोजनाएं बेकायदा तौर पर इसी समूह के हलक में डाल दी गर्इं। मुंबई के ६० प्रतिशत भूखंड इस समूह के पास हैं और बाकी लोढा समूह के पास। मुंबई की सबसे ज्यादा झुग्गी पुनर्वसन परियोजनाएं फडणवीस की कृपा से एक ही बिल्डर के कब्जे में हैं। यह सब भाजपा के सहयोग से चलता है। जनता का, राज्यों का, सार्वजनिक क्षेत्र का नुकसान करके ऐसा करना राष्ट्रीय अपराध है और इन लेन-देन का ‘किकबैक’ सबको उनकी योग्यता के मुताबिक मिलता रहता है।
सरकार, अदालतें, सार्वजनिक बैंक और राजनेता, भारत में क्रोनी कैपिटलिजम के कमीशन में बराबर के हिस्सेदार हैं।
सत्य, धर्म, साहस
वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल भारत में हो रहे क्रोनी कैपिटलिजम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। अग्रवाल को निश्चित ही परिणामों की कल्पना होगी। अग्रवाल इंग्लैंड में स्थित अपने ‘पैलेस’ में रहते हैं, फिर भी वे खुद को पहले ‘बिहारी’ और फिर भारतीय मानते हैं। इस घटनाक्रम के बाद अनिल अग्रवाल ‘एक्स’ पर लिखते हैं, ‘‘आज सुबह मैंने भगवद गीता का १६वां अध्याय पढ़ा। एक विचार ने मुझे स्तब्ध कर दिया। ‘हिम्मत रखो, विचलित मत हो, नम्र रहो, किसी भी स्वार्थ के बिना अपना कर्तव्य निभाते रहो।’ जीवन का यही उद्देश्य होना चाहिए। मुझे याद आता है, कुछ साल पहले जयप्रकाश गौर मुझे लंदन में मिलने आए थे। जेपी ग्रुप को बड़े कष्ट से उन्होंने खड़ा किया था। एक साम्राज्य ही उन्होंने बनाया था। वे मुझे आगे भी कई बार मिले। उन्होंने मुझे कई बार हिंदी में पत्र लिखे। उनकी एक ही इच्छा कई बार दिखी, वह यह कि उनके द्वारा खड़े किए गए ये उद्योग अत्यंत सुरक्षित हाथों में जाएं और उनका उपयोग प्रामाणिक तरीके से हो। इस कार्य में मैं उनकी मदद करूं, ऐसी उनकी इच्छा थी, लेकिन हमने उनकी संपत्ति में ज्यादा रुचि नहीं ली। हाल ही में यह पूरी संपत्ति Public Auction यानी सार्वजनिक नीलामी प्रक्रिया में कानूनी तरीके से आई। अनेक बड़ी कंपनियों और बिडर्स (Bidders) ने इसमें बोली लगाई। अचानक मुझे जयप्रकाश गौर की भावनाओं और इच्छाओं की याद आ गई। उस नीलामी प्रक्रिया से आगे कई कंपनियों ने पीछे हटना शुरू किया। आखिरकार हमारी बोली सर्वोच्च साबित हुई और हम उस नीलामी की बोली में सफल रहे। यह अत्यंत पारदर्शी प्रक्रिया थी। हमें कानूनी तौर पर लिखित में बताया गया कि आप जीत गए हैं; लेकिन जीवन इतना आसान नहीं होता। कुछ दिनों बाद यह फैसला ही बदल दिया गया। यह धक्कादायक था। हमें इस संपत्ति का कोई मोह नहीं है। अगर यह मिलती है तो ईश्वर की इच्छा। अगर नहीं मिलती है तो भी ईश्वर की ही इच्छा। अगर ‘धर्म’ कोई चीज हमें दे रहा है तो उसे नकारना नहीं चाहिए। विश्वास, सत्य और श्रद्धा इन भावनाओं से समझौता नहीं होना चाहिए। अब इस पर क्या जवाब? गीता इस पर मार्गदर्शन करती है, ‘तुम्हारा कर्तव्य तुम हिम्मत से पूरा करो।’ किसी भी द्वेष और मोह के बिना हम वही कर रहे हैं।’’
‘‘हम सत्य और धर्म का मार्ग अपनाएंगे। बाकी सब हम ईश्वर पर छोड़ते हैं!’’
अनिल अग्रवाल ने सत्य, धर्म और साहस का मार्ग अपनाकर महाभारत का शंखनाद फूंक दिया है।
भारत में ऐसा पिछले १२ सालों में पहली बार हो रहा है।
