– एक झटके में रद्द किए १२२ ट्रांसफर
– शिकायतों का दबाव पड़ा भारी
– पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
तबादलों में कथित खेल उजागर होने के बाद मुंबई मनपा को आखिरकार बैकफुट पर आना पड़ा। घोटाले के गंभीर आरोपों और लगातार बढ़ती शिकायतों के दबाव के बीच प्रशासन ने एक झटके में १२२ इंजीनियरों के तबादले रद्द कर दिए, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है। इस पैâसले ने न सिर्फ ‘ट्रांसफर मार्वेâट’ की आशंकाओं को हवा दी है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर मनपा की नीयत पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे विवाद के बाद महापौर रितु तावड़े ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की मांग की। इसके बाद यह मामला अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकणे को सौंपा गया। जांच के बाद तबादले रद्द करने का निर्णय लिया गया। इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने इन तबादलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के बाद तत्कालीन आयुक्त भूषण गगराणी ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए तबादलों पर रोक लगा दी थी। उसी समय इस मामले की गंभीरता सामने आ गई थी और आगे की कार्रवाई की दिशा तय हुई थी।
तबादला प्रक्रिया के लिए स्वतंत्र समिति की मांग
भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने के लिए तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र समिति के माध्यम से लागू करने की मांग तेज हो गई है। स्पष्ट नियमों और मानकों पर आधारित प्रणाली लागू करने की आवश्यकता जताई जा रही है। अब आने वाले समय में मनपा प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
