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संपादकीय : ट्रंप कृत भारत का अपमान… मोदी का स्वाभाविक मौन!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बेतुकी बयानबाजी, एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं। अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्ति के राष्ट्रपति को बोलते और व्यवहार करते समय जो गरिमा दिखानी चाहिए, उसका नामोनिशान भी प्रेसिडेंट ट्रंप के बोलने-चालने में नहीं होता। अन्य देशों और उन देशों के नेताओं के प्रति एक प्रकार की घृणा, द्वेष और द्वेषपूर्ण भावना उनके हर वाक्य में दिखाई देती है। इससे भारत और उनके ‘परम मित्र’ प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं बच पाते। एक तरफ भारत को मित्र कहना और दूसरी तरफ भारत के बारे में जहर उगलना; अब भी ट्रंप ने वही किया है। अमेरिका में जन्मजात नागरिकता के विवाद के संदर्भ में बोलते हुए ट्रंप ने भारत की तुलना सीधे नरक से की है। ‘भारत और चीन ‘नरक के द्वार’ हैं’, ऐसा जहर इस महाशय ने उगला है। सोशल मीडिया पोस्ट में यह अभद्र टिप्पणी करते समय उन्होंने अमेरिकी लेखक माइकल सैवेज के एक वीडियो का आधार लिया है। उसमें सैवेज ने यह तर्क दिया है कि ‘भारतीय या अन्य
एशियाई लोग
अमेरिका में केवल इसलिए आते हैं कि नौवें महीने में उन्हें बच्चा पैदा हो और जन्म होते ही वह अमेरिकी नागरिक बन जाए। ट्रंप ने इसी बात को दोहराया है। मूल रूप से ‘जन्मजात अमेरिकी नागरिकता’ के प्रावधान को रद्द किया जाना चाहिए या सीमित किया जाना चाहिए, ऐसी मांग ट्रंप पहले भी कर चुके हैं। अमेरिका में भारतीय नागरिकों और प्रधानमंत्री मोदी ने ‘केम छो ट्रंप’ कहकर ट्रंप को बहुत सिर पर चढ़ाया था। लेकिन दूसरी बार राष्ट्रपति पद का स्वार्थ सिद्ध होने के बाद यही ट्रंप मोदी और अमेरिकी भारतीयों को पैरों तले रौंदने का एक भी मौका नहीं छोड़ते। भारत को नरक कहना और जन्मजात नागरिकता के मुद्दे पर अमेरिकी भारतीयों का अपमान करना उसी ट्रंप नीति का हिस्सा है। इसी दबाव की नीति का उपयोग करके ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की बोलती बंद कर दी है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लेकर भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ तक, साथ ही
रशियन तेल की खरीद से लेकर
ईरान युद्ध में शांति चर्चा तक, ट्रंप ने मोदी की अवस्था इस प्रकार कर दी है जैसे कोई ‘मुंह दबाकर मुक्कों की बौछार’ करता हो। ट्रंप भारत और भारतीयों के बारे में कुछ भी बड़बड़ाते हैं और मोदी उस पर गांधीजी के तीन बंदरों की भूमिका अपनाकर मौन साध लेते हैं। ट्रंप भारत का, भारतीय नेतृत्व का और अमेरिका के विकास में बहुमूल्य योगदान देनेवाले अमेरिकी भारतीयों का गंदे शब्दों में अपमान करते हैं और मोदी इस अपमान को निगलकर उस पर ट्रंप की दोस्ती की ‘डकार’ लेते हैं, पिछले कुछ वर्षों से ऐसा ही चल रहा है। इसी कारण भारत को नरक कहने तक प्रेसिडेंट ट्रंप की हिम्मत बढ़ गई है। कुछ वर्षों पहले मोदी ने स्वयं ‘पता नहीं, क्या पाप किए जो हिंदुस्तान में पैदा हुए’ जैसे शब्दों में मातृभूमि का अपमान विदेशी धरती पर सरेआम किया था। इसलिए वे ट्रंप से क्या जवाब मांगेंगे? प्रेसिडेंट ट्रंप लगातार भारत का अपमान कर रहे हैं। भारत को नरक कह रहे हैं और ट्रंपवाद में ‘स्वर्ग’ देखनेवाले मोदी निश्चित रूप से मौन साधे हुए हैं!

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