सामना संवाददाता / मुंबई
गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही हर साल की तरह ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ चरम पर पहुंच गई है। लंबी वेटिंग लिस्ट, ठसाठस भरे डिब्बे और घंटों का इंतजार—यात्रियों की यही हकीकत बन चुकी है। ऐसे में मध्य रेलवे ने एक बार फिर ‘राहत’ के नाम पर अतिरिक्त ट्रेनों का एलान किया है। हालांकि बड़ा सवाल वही है कि क्या यह कदम वास्तव में राहत देगा या सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह जाएगा? मध्य रेलवे ने लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सुलतानपुर और वाराणसी के बीच कुल ३४ समर स्पेशल ट्रेनों को चलाने की घोषणा की है। ये ट्रेनें २१ मई से १६ जुलाई २०२६ के बीच संचालित की जाएंगी। रेलवे का दावा है कि इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
मुंबई-सुलतानपुर रूट पर १८ साप्ताहिक विशेष सेवाएं चलाई जाएंगी। ट्रेन क्रमांक ०४२११ हर गुरुवार दोपहर २:३५ बजे मुंबई से रवाना होकर अगले दिन रात ११ बजे सुलतानपुर पहुंचेगी, जबकि ०४२१२ हर बुधवार सुबह ४ बजे सुलतानपुर से चलकर अगले दिन दोपहर १२:२० बजे मुंबई पहुंचेगी। वहीं मुंबई-वाराणसी रूट पर १६ विशेष सेवाओं का ऐलान किया गया है। ट्रेन क्रमांक ०४२२५ हर शुक्रवार दोपहर २:३५ बजे मुंबई से रवाना होकर तीसरे दिन तड़के २:०५ बजे वाराणसी पहुंचेगी। वापसी में ०४२२६ हर गुरुवार रात १:३५ बजे वाराणसी से चलकर अगले दिन दोपहर १२:२० बजे मुंबई पहुंचेगी। इन ट्रेनों का ठहराव ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, झांसी, कानपुर और लखनऊ जैसे प्रमुख स्टेशनों पर होगा। हालांकि सबसे बड़ा सवाल कोच संरचना को लेकर उठ रहा है। रेलवे ने इन ट्रेनों में १४ एसी थर्ड इकॉनॉमी, सिर्फ ४ जनरल और २ जनरेटर कोच रखने का पैâसला किया है। यानी जिन सामान्य डिब्बों में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है, उनकी संख्या बेहद सीमित रखी गई है। इससे साफ है कि असली दबाव झेलने वाले यात्रियों की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ सकती है।
बुकिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यात्री यूटीएस सिस्टम या `रेल वन ऐप’ के जरिए टिकट ले सकते हैं। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी स्थिति वही नजर आ रही है—घोषणाएं बड़ी, लेकिन इंतजाम छोटे।
