मुख्यपृष्ठनए समाचारफोकस : चलती ट्रेन में `ढिशूम-ढिशूम'...तूने मुझे धक्का कैसे मारा?

फोकस : चलती ट्रेन में `ढिशूम-ढिशूम’…तूने मुझे धक्का कैसे मारा?

  `बाजूल सरक’ से शुरू लड़ाई लात-घूंसों तक आई

-छोटी-छोटी बातों पर लोकल में हो रहे बड़े-बड़े `लफड़े’

जेदवी

मुंबई की लोकल ट्रेनें, जिन्हें शहर की `लाइफलाइन’ कहा जाता है, अब महिलाओं के लिए ही खतरे की घंटी बनती जा रही हैं। `तूने मुझे धक्का वैâसे मारा?’ जैसे मामूली सी बात पर लोकल ट्रेन में लफड़ा अब आम बात हो चुकी है। लगातार बढ़ती भीड़, अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के बीच महिला डिब्बों में हिंसक घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ताजा मामला सीएसएमटी-आसनगांव लोकल का है, जिसने एक बार फिर सिस्टम की पोल खोल दी है।
दरअसल,१६ अप्रैल की शाम ठाणे और डोंबिवली के बीच महिला डिब्बा खचाखच भरा हुआ था। भीड़ के बीच एक महिला ने दूसरी से ‘बाजूला सरक’ (जरा हटो) कहा। लेकिन यह मामूली सी बात देखते ही देखते हिंसक विवाद में बदल गई। आरोपी महिला ने आपा खोते हुए न केवल गाली-गलौज की, बल्कि पीड़ित महिला अनुष्का राव के बाल खींचे और उसे लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा। डिब्बे में अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत पैâल गई। घटना का वीडियो किसी यात्री ने मोबाइल में वैâद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने एक कड़वी सच्चाई उजागर की है कि महिला डिब्बे अब सुरक्षित नहीं रहे।
घटनाओं की बढ़ती लिस्ट, सिस्टम पर उठते सवाल
सीएसएमटी-आसनगांव (अप्रैल २०२६): ‘जगह दो’ कहने पर मारपीट।
कर्जत-मुंबई लोकल: पहले चढ़ने की होड़ में हिंसा, बीच-बचाव करने वाले भी घायल
विक्रोली-घाटकोपर: विवाद में महिला ने दूसरी का हाथ काट लिया।
घाटकोपर फास्ट लोकल (फरवरी २०२६): बुर्का पहनकर पुरुष महिला डिब्बे में घुसा, चलती ट्रेन से कूदकर फरार
दादर-मुलुंड: महिला डिब्बे के पास अश्लील हरकतों की शिकायत
ये घटनाएं इशारा करती हैं कि भीड़ अब सिर्फ असुविधा नहीं, हिंसा की वजह बन चुकी है।
पुलिस कार्रवाई, लेकिन रोकथाम नदारद
पीड़िता ने ठाणे रेलवे पुलिस (जीआरपी) में शिकायत दर्ज कराई है। आरोपी महिला की तलाश जारी है और मामला गैर-संज्ञेय अपराध के तहत दर्ज किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि हर घटना के बाद कार्रवाई क्यों, पहले रोकथाम क्यों नहीं?

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