हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लाभ से वंचित हजारों कर्मचारी, 40 वर्षों से लंबित मुद्दे पर जल्द निर्णय की अपील
अनिल मिश्र | पटना
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता एवं बिहार प्रदेश वित्त रहित अनुदानित शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ के प्रदेश संयोजक विजय कुमार मिठ्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, प्रो. (डॉ) अरविंद कुमार, डॉ अनिल कुमार सिन्हा, विपिन बिहारी सिन्हा, प्रो विश्वनाथ कुमार, प्रो कमलेश यादव, इंटक के जिला महासचिव टिंकू गिरी, डॉ मदन कुमार सिन्हा सहित अन्य नेताओं ने कहा है कि बिहार में वर्षों से संचालित हजारों वित्त रहित अनुदानित डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, प्लस 2 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उच्च विद्यालय और मध्य विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी लंबे समय से नियमित वेतनमान और पेंशन की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें सरकारी संस्थानों की तरह वेतन और पेंशन नहीं मिल रही है, जिससे उनमें गहरी निराशा और आक्रोश है।
नेताओं ने बताया कि वर्ष 2025 में पटना उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सभी संबंधित कर्मचारियों को तीन माह के भीतर सरकारी कॉलेजों के समान नियमित वेतनमान और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, इस अवधि के अंतिम दिन राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी। इस याचिका में कई संबंधन प्राप्त डिग्री कॉलेज भी हस्तक्षेपकर्ता के रूप में शामिल होकर न्याय की मांग कर रहे हैं।
नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को नियमित वेतनमान और पेंशन देने का आश्वासन दिया था। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन भी किया गया, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2008 से छात्रों के परिणाम के आधार पर मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान वर्ष 2018 से लंबित है। लगभग नौ वर्षों से यह बकाया नहीं मिलने के कारण शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और कई परिवारों की स्थिति बेहद कठिन हो चुकी है।
नेताओं ने सवाल उठाया कि एक ओर राज्य सरकार ने 534 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज सुनिश्चित करने के लिए 208 नए कॉलेज खोलने और लगभग दस हजार पदों पर नियुक्ति का निर्णय लिया है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई है, वहीं दूसरी ओर करीब 200 वित्त रहित अनुदानित कॉलेजों के लगभग 25 हजार कर्मचारियों के वेतनमान और पेंशन के मुद्दे पर सरकार मौन है।
इस संबंध में नेताओं ने कहा कि शुक्रवार, 1 मई मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री के गया और बोधगया दौरे के दौरान महासंघ के प्रतिनिधि उनसे मिलकर इस 40 वर्षों से लंबित मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को नियमित वेतनमान और पेंशन देने की घोषणा कर उनके साथ न्याय किया जाए।
