मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु : ‘यूएस–कनाडा की नीतियां: भारतीय निवेशक क्या सीख सकते हैं?’

निवेश गुरु : ‘यूएस–कनाडा की नीतियां: भारतीय निवेशक क्या सीख सकते हैं?’

भरतकुमार सोलंकी
मुंबई

क्या किसी देश की आर्थिक नीतियां दूसरे देश के निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकती हैं? क्या अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों की नीतियों का अध्ययन भारतीय पाठकों के लिए लाभदायक है? जवाब है-हां, यदि हम उन्हें समझकर अपने संदर्भ में लागू करें।
यूएस-कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं में एक समानता स्पष्ट दिखती है-संरचना (स्ट्रक्चर) और अनुशासन (डिसिप्लिन)। वहां व्यक्ति की आय को तीन हिस्सों में देखा जाता है: खर्च, सुरक्षा (इंश्योरेंस/रिटायरमेंट) और निवेश। सवाल यह है-क्या भारत में हम ऐसा करते हैं, या पूरी आय को ‘खर्च + बचत’ के सीमित नजरिए से देखते हैं? इन देशों में रिटायरमेंट प्लानिंग कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। लोग अपने करियर की शुरुआत से ही टैक्स-एफिशिएंट साधनों में निवेश करते हैं-जैसे रिटायरमेंट अकाउंट्स, इंडेक्स फंड्स और विविधीकृत पोर्टफोलियो। क्या यह दृष्टिकोण हमें नहीं सिखाता कि ‘पहले निवेश, फिर खर्च’ की आदत ही वेल्थ क्रिएशन की असली नींव है? दूसरी बड़ी सीख-टैक्स प्लानिंग बनाम टैक्स पेमेंट। यूएस और कनाडा में लोग सिर्फ टैक्स भरते नहीं, बल्कि उसे प्लान करते हैं। वे वैध तरीकों से अपनी इंवेस्टिबल सरप्लस बढ़ाते हैं-कटौतियों, दीर्घकालीन निवेश और एसेट एलोकेशन के माध्यम से। सवाल है-क्या हम भी अपनी आय को इसी नजर से देखते हैं, या साल के अंत में जल्दबाजी में टैक्स बचत के फैसले लेते हैं? तीसरी बात-इक्विटी की समझ। वहां आम नागरिक भी बड़े बिजनेस का हिस्सा बनने में सहज है-सीधे शेयरों या म्यूचुअल फंड्स के जरिए। क्या यह सोच हमें नहीं बताती कि संपत्ति सिर्फ प्रॉपर्टी या सोना नहीं, बल्कि क्वालिटी बिजनेस में भागीदारी भी है? और क्या यही भागीदारी लंबी अवधि में महंगाई को मात नहीं देती?
चौथी सीख- जोखिम का प्रबंधन, न कि उससे भागना। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता के समय लोग घबराकर बाहर नहीं निकलते, बल्कि व्यवस्थित निवेश (एसआईपी/ पीरियोडिक इन्वेस्टिंग) जारी रखते हैं। क्या हम बाजार गिरने पर अवसर देखते हैं, या सिर्फ डर? अब सबसे बड़ा सवाल-क्या इन नीतियों को भारत में लागू किया जा सकता है? जवाब है-पूरी तरह नहीं, पर सिद्धांत (प्रिंसिपलस) जरूर अपनाए जा सकते हैं: स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासित निवेश, टैक्स की समझ और लंबी अवधि का दृष्टिकोण।
अंत में खुद से पूछिए- क्या आप केवल कमाने और खर्च करने तक सीमित हैं या एक ऐसी प्रणाली बना रहे हैं जो आपके लिए काम करे?
क्योंकि सच्चाई यही है- देश बदल सकता है, नियम बदल सकते हैं, लेकिन वेल्थ क्रिएशन के सिद्धांत नहीं बदलते।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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