-‘टॉमहॉक’, ‘एजीएम-१५८’, ‘एमक्यू-९’ बड़ी संख्या में हुए फेल
-रिवर्स इंजीनियरिंग करके ईरानी बनाएंगे नए हथियार
एजेंसी / तेहरान
ईरान में अब उन अमेरिकी और इजराइली बमों और हथियारों की ‘रिवर्स इंजीनियरिंग’ की चर्चा चल रही है, जो अब तक नहीं फटे हैं। ईरान के मीडिया और विश्लेषक हालिया संघर्ष के दौरान मिले इन हथियारों को एक बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक तरह से ईरान के लिए वरदान हो सकते हैं और इससे देश की सैन्य क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
ईरान में अंग्रेजी सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने रिपोर्ट दी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने होरमोजगान प्रांत में ‘१५ से अधिक भारी अमेरिकी मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।’ रिपोर्ट में कहा गया कि इन हथियारों को ‘रिवर्स इंजीनियरिंग (तकनीक समझकर दोबारा बनाने) के लिए टेक्नोलॉजी और रिसर्च यूनिटों को सौंप दिया गया है।
ईरानी लैब में पहुंच गए अमेरिकी हथियार!
ईरान पर किए हमले में अमेरिका के कई हथियार फटे ही नहीं। अब ईरान ने इन्हें बरामद किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बरामद हथियारों में अमेरिका के चर्चित जीबीयू-५७ बंकर-बस्टर बम और जंजान क्षेत्र में मिले हजारों छोटे बम (बॉम्बलेट्स) भी शामिल हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान टॉमहॉक और एजीएम-१५८ जैसी एडवांस मिसाइलें और एमक्यू-९ ड्रोन भी बड़ी संख्या में फेल हुए। सरकारी मीडिया के कुछ चेहरों ने भी इसी तरह की बात दोहराई। अब इन सबको ईरानी लैब में भेजा गया है। एक टीवी एंकर ने कहा कि ‘इन मिसाइलों की रिवर्स इंजीनियरिंग की जाएगी और भविष्य में इन्हें अमेरिका जैसे दुश्मनों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर भी सरकार समर्थक यूजर्स ने इसे ‘हमारे लिए अच्छी और अमेरिका के लिए बुरी खबर’ बताया और कुछ ने ‘जल्द बड़े पैमाने पर उत्पादन’ की भविष्यवाणी की। तेहरान के अधिकारी एहसान खरामिद ने इसे ‘सिर्फ खबर नहीं, बल्कि ज्ञान की नई लड़ाई की शुरुआत’ बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया के अनुसार, ‘इन हथियारों से अमेरिकी तकनीक के ‘छिपे हुए पहलुओं’ का पता चल सकता है।’ मध्य पूर्व के विश्लेषक एहसान तकद्दोसी ने कहा कि इससे अमेरिका को नई तकनीक विकसित करने पर ‘दसियों अरब डॉलर’ खर्च करने पड़ सकते हैं और वह सैन्य कार्रवाई में ज्यादा सतर्क हो सकता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि ‘यह ऐसे है, जैसे किसी जटिल ताले को बिना चाबी के समझ लेना। असली फायदा उसे सीधे इस्तेमाल करने में नहीं, बल्कि उसकी तकनीक को समझकर दोबारा बनाने में है।’
पश्चिमी देशों का डर
ईरानी मीडिया का कहना है कि ईरान में रह गए इन हथियारों का इस्तेमाल बेहतर टेक्नोलॉजी विकिसित करने में हो सकता है। उसने इस बारे में पश्चिमी देशों का हवाला दिया है और कहा है कि उनका असली डर यही है कि ईरान इन आधुनिक हथियारों की ‘गुप्त तकनीक’ को समझने में लगा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रतिबंधों के कारण ईरान लंबे समय से रिवर्स इंजीनियरिंग पर निर्भर रहा है। उदाहरण के तौर पर ईरान ने अमेरिकी हॉक मिसाइलों में बदलाव किया था।
कॉपी नहीं, इनोवेशन
२०११ में अमेरिकी आरक्यू-१७० ड्रोन मिसाइलों को जब्त करना भी ऐसी ही घटना थी। एसएनएन का कहना है कि उसी घटना के बाद ईरान ‘कॉपी करने’ से आगे बढ़कर ‘इनोवेशन’ की दिशा में गया।
रक्षा उद्योग का ‘रिसर्च लैब’
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच ४० दिनों तक चले युद्ध के बाद ८ अप्रैल को दो हफ्ते के लिए युद्धविराम की घोषणा की गई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे फिर आगे बढ़ा दिया था। उसका कहना था कि युद्ध का मैदान अब ‘देश के रक्षा उद्योग के लिए एक रिसर्च लैब’ बन गया है। एसएनएन के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की ओर से दागे गए बम और हथियारों को एक रणनीतिक अवसर में बदल सकता है।
