मुख्यपृष्ठअपराधतहकीकात : मामूली पेडलर से ‘ड्रग्स किंग' कैसे बना सलीम डोला

तहकीकात : मामूली पेडलर से ‘ड्रग्स किंग’ कैसे बना सलीम डोला

फिरोज खान
१९६६ में मुंबई के भायखला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे सलीम डोला का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। उसे कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का शौक था, इसलिए स्कूल की दुनिया छोड़कर नशे के धंधे में जाने की सोचने लगा। डोंगरी इलाके में गांजा और चरस की पुड़िया इधर से उधर पंहुचाने का काम शुरू किया। इसमें भी उसे रिस्क ज्यादा और कमीशन कम मिलने से वह खुश नहीं था। एक दिन पायधुनी में रहने वाले ऐसे शख्स से उसकी मुलाकात हुई जो दाऊद इब्राहिम के लिए ड्रग्स का काम करता था। उसी के जरीए वह दाऊद इब्राहिम तक पंहुचा। डोला ने दाऊद को सुझाव दिया कि चरस, कोकेन और गांजा से ज्यादा एमडी से पैसा कमाया जा सकता है। और फिर वह भारत में सक्रिय सबसे बड़े सिंथेटिक ड्रग निर्माण और आपूर्ति कार्टेल का मास्टरमाइंड बन गया। सलीम डोला की असली ताकत उसका वह सिंडिकेट था, जो केवल गांजे या चरस तक सीमित नहीं था। दाऊद की मदद से उसने ‘पार्टी पिल्स’ और सिंथेटिक ड्रग्स के बाजार में कदम रखा, जिसकी मांग बड़े शहरों के क्लबों और हाई-प्रोफाइल पार्टियों में बहुत ज्यादा थी। सलीम ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जो विदेशों से नशीले पदार्थ मंगवाता था और देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करता था। अनुमान लगाया गया है कि उसका यह ड्रग सिंडिकेट लगभग ५,००० करोड़ रुपए का है। उसने तस्करी के लिए ऐसे रास्तों और तरीकों का इस्तेमाल किया कि लंबे समय तक वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहा। सलीम डोला सिर्फ ड्रग्स बेचने तक नहीं रुका। जुर्म की दुनिया में एक पुरानी कहावत है कि ‘काले धन को सफेद करना जरूरी है।’ सलीम ने भी यही किया। ड्रग्स की तस्करी से जो करोड़ों-अरबों रुपए आए, उसे उसने मुंबई और अन्य शहरों के रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करना शुरू कर दिया। उसने बड़ी-बड़ी संपत्तियां खरीदीं और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया। इससे न केवल उसका पैसा ‘ह्वाइट’ होने लगा, बल्कि समाज में उसकी पकड़ भी मजबूत होने लगी। रियल एस्टेट का इस्तेमाल उसने अपने ड्रग सिंडिकेट को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक ढाल के रूप में किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स की खेप पहुंचाने में वह दाऊद की मदद लेता था। भारत में दबाव बढ़ने पर वह देश छोड़कर भाग गया और खाड़ी देशों व तुर्की जैसे स्थानों से अपना काला कारोबार चलाने लगा। उसके सिंडिकेट के तार पाकिस्तान, दुबई और यूरोप तक पैâले हुए थे, जो यह साबित करता है कि वह महज एक लोकल डीलर नहीं, बल्कि एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बन चुका था। ​​उसके द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले अवैध पदार्थों का दायरा जल्द ही मारिजुआना या ‘वीड’ में बदल गया और एनसीबी द्वारा उसकी पहली गिरफ्तारी २०१२ में हुई जब उसके पास से ८० किलोग्राम मारिजुआना बरामद हुआ। जेल से रिहा होने के बाद उसकी पहचान ऐसे शख्स से हुई जिसने फेंटानिल से बने सिंथेटिक ड्रग ‘बटन’ की निर्माण इकाई स्थापित करने का फार्मूला बता दिया। दूसरी गिरफ्तारी २०१८ में हुई जब सलीम डोला के पास से १०० किलोग्राम फेंटानिल बरामद हुआ। हालांकि, कुछ ही महीनों में नमूनों की जांच में फेंटानिल की मौजूदगी न दिखने के बाद उसे जमानत मिल गई। इसके बाद सलीम डोला संयुक्त अरब अमीरात भाग गया, वहां फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाया और तुर्की भाग गया, जहां आखिरकार उसे पकड़ लिया गया।

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