मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा : हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता 

फलसफा : हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता 

सना खान
आज की दुनिया में हर किसी को जवाब चाहिए। हर बात पर प्रतिक्रिया चाहिए। और अगर आप चुप रह जाएं, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है- ‘तुम चुप क्यों रहे?’ लेकिन सच यह है कि जिंदगी में हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी खामोशी ही सबसे सच्चा और सबसे मजबूत जवाब होती है। हर जगह बोलना समझदारी नहीं होती। कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जहां आपका जवाब देना आपकी कीमत घटा देता है और आपकी खामोशी आपकी गरिमा को और ऊंचा कर देती है। हर बहस जीतना जरूरी नहीं। हर गलत बात को साबित करना जरूरी नहीं और हर इंसान को समझाना भी जरूरी नहीं होता। क्योंकि कुछ लोग समझना ही नहीं चाहते और कुछ लोग सिर्फ आपकी प्रतिक्रिया चाहते हैं। यहीं से शुरू होता है अनावश्यक उलझनों का सिलसिला जहां आप अपनी ऊर्जा खोते हैं और सामने वाला सिर्फ आपकी प्रतिक्रिया से संतुष्टि पाता है। जिंदगी का एक गहरा फलसफा यह भी है- ‘जहां आपकी कद्र नहीं, वहां आपकी आवाज भी मायने नहीं रखती।’ कभी-कभी पीछे हट जाना हार नहीं होती, बल्कि यह अपने सुकून को चुनने का एक समझदारी भरा और साहसिक पैâसला होता है। जैसे-जैसे आप खुद को समझने लगते हैं, वैसे-वैसे आप दुनिया को समझाने की कोशिश छोड़ देते हैं। और यही असली परिपक्वता है। खामोशी हर बार कमजोरी नहीं होती। कभी-कभी यह उस ऊंचाई का संकेत होती है, जहां आप अनावश्यक बातों, बेवजह की बहसों और लोगों की सोच से ऊपर उठ चुके होते हैं। इसलिए हर जगह बोलना जरूरी नहीं, हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं। कुछ एहसास ऐसे होते हैं, जो समझाने के लिए नहीं- सिर्फ महसूस करने के लिए होते हैं।

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