मुख्यपृष्ठनए समाचारविजय सरकार को १५० का बंपर समर्थन...तमिलनाडु में भाजपा की रणनीतिक हार!

विजय सरकार को १५० का बंपर समर्थन…तमिलनाडु में भाजपा की रणनीतिक हार!

-दलपति की सूझ-बूझ और राहुल गांधी की समझ के आगे एनडीए ने टेके घुटने

अनिल तिवारी

तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार, १३ मई २०२६ का दिन बड़े उलटफेर के रूप में दर्ज हो गया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में विश्वास मत जीतकर न केवल अपनी कुर्सी सुरक्षित कर ली, बल्कि दक्षिण की राजनीति में नया समीकरण भी खड़ा कर दिया। २३४ सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा ११८ था, जबकि विजय सरकार के पक्ष में १४४ विधायकों ने मतदान किया। २२ वोट खिलाफ पड़े और ५ विधायकों ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
सदन में मतदान से पहले माहौल गरम रहा। डीएमके विधायकों ने वॉकआउट किया, वहीं एआईएडीएमके में टूट ने पूरे राजनीतिक गणित को बदल दिया। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि विजय ने कांग्रेस, वामदलों और सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाले दलों को साथ लेकर एनडीए की रणनीति को निष्प्रभावी कर दिया। कांग्रेस का डीएमके से अलग होकर विजय के साथ जाना पहले ही तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा था। राहुल गांधी की राजनीतिक समझ और विजय की सूझ-बूझ ने मिलकर भाजपा-एनडीए के विस्तारवादी मंसूबों पर रोक लगा दी। भाजपा और उसके सहयोगियों की कोशिश थी कि सत्ता समीकरण को अंत तक उलझाया जाए, लेकिन विश्वास मत के नतीजे ने साफ कर दिया कि तमिलनाडु में फिलहाल दलपति विजय ही सत्ता के असली केंद्र हैं।

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